भुसावर: राजस्व न्यायालयों में ई-फाइलिंग के खिलाफ वकीलों का हल्लाबोल, न्यायिक कार्यों का अनिश्चितकालीन बहिष्कार शुरू
भुसावर अभिभाषक संघ ने ई-फाइलिंग प्रक्रिया को जटिल बताते हुए राजस्व न्यायालयों में न्यायिक कार्यों का पूर्ण बहिष्कार कर दिया है। अध्यक्ष नवीन कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में उपखण्ड अधिकारी राधेश्याम मीणा को ज्ञापन सौंपकर इस व्यवस्था को तुरंत बंद करने की मांग की गई है। प्रदेशव्यापी आंदोलन के समर्थन में भुसावर के वकीलों ने अब आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है, जिससे न्यायिक कार्य ठप हो गए हैं।

भुसावर। राजस्थान के राजस्व न्यायालयों में लागू की गई नई ई-फाइलिंग प्रक्रिया के खिलाफ अब विरोध की ज्वाला धधकने लगी है। भुसावर में अभिभाषक संघ ने इस तकनीकी व्यवस्था को आम जनता के लिए बेहद जटिल और परेशानी का सबब बताते हुए इसके पूर्ण बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। वकीलों के इस कड़े रुख से न्यायिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है, जिसका सीधा असर अब आम फरियादियों और लंबित मुकदमों की सुनवाई पर पड़ना तय माना जा रहा है।
अभिभाषक संघ भुसावर की एक महत्वपूर्ण बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि डिजिटल प्रक्रिया के नाम पर थोपी जा रही ई-फाइलिंग व्यवस्था जनहित में नहीं है। संघ के अध्यक्ष नवीन कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में वकीलों का एक प्रतिनिधिमंडल उपखण्ड कार्यालय पहुँचा, जहाँ उन्होंने राजस्व मण्डल अजमेर के नाम एक ज्ञापन उपखण्ड अधिकारी राधेश्याम मीणा को सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से वकीलों ने अपनी मांगों को पुरजोर तरीके से रखते हुए स्पष्ट किया कि जब तक इस जटिल प्रक्रिया को वापस नहीं लिया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
अध्यक्ष नवीन कुमार पाण्डेय ने मामले की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रदेशभर के अधिवक्ता संघ इस व्यवस्था का विरोध कर रहे हैं। भुसावर के अधिवक्ताओं ने भी राज्यव्यापी आह्वान के समर्थन में यह कदम उठाया है। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि ई-फाइलिंग न केवल तकनीकी रूप से पेचीदा है, बल्कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली आम जनता को न्याय पाने में अधिक मशक्कत और आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ रहा है।
विरोध के इस स्वर को और प्रखर करते हुए भुसावर के अधिवक्ताओं ने स्वेच्छा से न्यायिक कार्यों के बहिष्कार का निर्णय लिया है। इसके तहत अब राजस्व न्यायालय में कोई भी अधिवक्ता न्यायिक कार्य में भाग नहीं लेगा और कार्य पूरी तरह स्थगित रखा जाएगा। वकीलों का यह सामूहिक अवकाश प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। यह आंदोलन केवल एक प्रक्रिया का विरोध नहीं, बल्कि उस कानूनी सुगमता की मांग है जो वर्षों से न्याय प्रणाली का आधार रही है। अब देखना यह होगा कि राजस्व मण्डल अजमेर वकीलों की इस मांग पर क्या रुख अपनाता है और क्या डिजिटल इंडिया की इस दौड़ में आम आदमी की सरलता को प्राथमिकता दी जाती है या नहीं।

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