भरतपुर जिले के भुसावर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छोकरवाड़ा की हालत देखकर हर कोई यही कह उठता है—“इसका तो राम ही रखवाला है।” अस्पताल परिसर में प्रवेश करते ही शोचालय से लेकर गलियारे और मुख्य द्वार तक दवाइयाँ कूड़े की तरह बिखरी दिखाई देती हैं। बदइंतजामी और अव्यवस्थाओं का यह आलम सिर्फ सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि ओपीडी समय और चिकित्सा सेवाओं पर भी गहरा सवाल खड़ा करता है।

शीतकालीन ओपीडी समय सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक नियत है, लेकिन डॉक्टरों की उपस्थिति का कोई निश्चित समय नहीं। शुक्रवार सुबह 9 बजे से मरीज अस्पताल पहुँच चुके थे, मगर डॉक्टरों का इंतजार करते रहे। पूछताछ में पाया गया कि डॉ. कमलेश 9:52 बजे अस्पताल पहुँचीं। जब उनसे देरी और ओपीडी समय में अनुपस्थिति को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वे तीन दिन से अवकाश पर थीं और फिलहाल इंचार्ज भी नहीं हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सीएचसी के इंचार्ज डॉ. पुष्पेंद्र सिंह ट्रेनिंग पर गए हुए हैं। समय पर नहीं आने के सवाल पर वे मौन रहीं।

अस्पताल में जांच सेवाओं का भी बुरा हाल है। मेडिकल टेस्ट कक्ष बंद मिला और कोई भी तकनीशियन मौजूद नहीं था। वार्ड में बने शोचालयों में दवाइयों के पैकेट भरे पड़े थे जबकि मेडिकल स्टोर में कूड़े की तरह दवाइयाँ बिखरी थीं। स्टाफ की कमी को लेकर जब सवाल उठाया गया तो डॉ. कमलेश ने कहा कि इस बारे में इंचार्ज से बात की जाए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 24 घंटे खुले रहना चाहिए, लेकिन शाम 6 बजे के बाद मुख्य गेट बंद मिलता है और इस लापरवाही का किसी के पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं। सीएमएचओ गौरव कपूर से इस मामले में संपर्क किया गया, मगर उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। वहीं भुसावर बीसीएमओ योगेश कुमार शुक्ल ने कहा कि उन्होंने हाल ही में कार्यभार संभाला है और ग्रामीण भी उनसे कई समस्याओं की शिकायत कर चुके हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले से सीएमएचओ को अवगत करवाकर उचित कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य केंद्र की अव्यवस्था का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। मरीज राजन्ती देवी के पोते ने बताया कि वे सुबह 10:30 बजे जांच कराने पहुँचे, लेकिन जांच कक्ष बंद होने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा। छोकरवाड़ा निवासी अंगूरी देवी सुबह 9 बजे से डॉक्टर का इंतजार करती रहीं और निराश होकर कहा कि उनके पास इंतजार के अलावा कोई विकल्प नहीं।

भुसावर सीएचसी की यह बदहाल तस्वीर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर स्थिति को उजागर करती है। अस्पताल प्रशासन की लापरवाही और ढीली कार्यप्रणाली के चलते मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा न मिलना इस केंद्र की विश्वसनीयता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। अब देखना यह होगा कि शिकायतों के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग कब तक ठोस कदम उठाता है।

Pratahkal Bureau

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