भुसावर: अरावली की अस्मिता बचाने को उमड़ेगा जनसैलाब, 3 जनवरी को कालिया पर्वत बचाने निकलेगी जन आक्रोश यात्रा
भुसावर उपखंड में 3 जनवरी को कालिया पर्वत बचाने के लिए 'जन आक्रोश यात्रा' का आयोजन किया जाएगा। बाबा चंद्रमा दास महाराज के नेतृत्व में निकलने वाली इस यात्रा में राकेश उर्फ रोकी पथैना सहित सुआ की जसवर और अलीपुर के ग्रामीण व साधु-संत भाग लेंगे। अरावली बचाओ अभियान के तहत होने वाले इस बड़े प्रदर्शन की पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

भुसावर। राजस्थान के भुसावर उपखंड में अरावली की वादियों और आस्था के केंद्र कालिया पर्वत को खनन व अन्य खतरों से सुरक्षित रखने के लिए अब निर्णायक जंग का आगाज होने जा रहा है। कालिया बाबा बचाओ संघर्ष समिति ने क्षेत्र की प्राकृतिक धरोहर और धार्मिक आस्था को संरक्षित करने के उद्देश्य से आगामी 3 जनवरी को एक विशाल 'जन आक्रोश यात्रा' निकालने का शंखनाद किया है। यह यात्रा केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि अरावली की पर्वत श्रृंखलाओं को बचाने के लिए एक जन-आंदोलन का रूप लेती दिखाई दे रही है, जो क्षेत्र के पारिस्थितिक तंत्र और आध्यात्मिक महत्व को अक्षुण्ण रखने के संकल्प के साथ शुरू होगी।
कालिया संघर्ष समिति के सक्रिय सदस्य राकेश उर्फ रोकी पथैना ने कार्यक्रम की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए बताया कि इस वृहद अभियान की शुरुआत कालिया बाबा की पहाड़ की तलहटी में स्थित ऐतिहासिक हसन का मंदिर से की जाएगी। अरावली बचाओ अभियान के अंतर्गत आयोजित होने वाली इस यात्रा का नेतृत्व प्रख्यात संत बाबा चंद्रमा दास महाराज करेंगे। इस यात्रा के माध्यम से प्रशासन और सरकार तक जनभावनाओं को पहुँचाने का प्रयास किया जाएगा कि पर्वत श्रृंखलाओं का दोहन स्थानीय संस्कृति और पर्यावरण के लिए कितना घातक सिद्ध हो सकता है।
इस जन आक्रोश यात्रा में सुआ की जसवर, अलीपुर सहित आसपास के दर्जनों गांवों के ग्रामीण अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। विशेष बात यह है कि इस मुहिम को संतों का भी पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त है, जिसके चलते बड़ी संख्या में साधु-संत इस यात्रा में शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे। स्थानीय लोगों का मानना है कि कालिया पर्वत और कालिया बाबा का स्थान उनकी आस्था का केंद्र है, और इसके अस्तित्व पर मंडराता कोई भी खतरा उनके इतिहास और भविष्य के लिए अपूरणीय क्षति होगा। 3 जनवरी को होने वाला यह आयोजन भुसावर क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरण की एक नई इबारत लिखने को तैयार है, जिसका व्यापक असर आगामी दिनों में शासन-प्रशासन की नीतियों पर भी देखने को मिल सकता है।

Pratahkal Bureau
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