जिले की वैर, भुसावर और हलैना तहसीलों में पेयजल की विकराल स्थिति ने अब एक व्यापक जन आंदोलन का रूप अख्तियार करना शुरू कर दिया है। किसान नेता एवं पूर्व जिला पार्षद इन्दल सिंह जाट ने इस संकटपूर्ण स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए राज्य सरकार से पुरजोर माँग की है कि बन्ध बारैठा जलाशय से बयाना के साथ-साथ वैर, भुसावर और हलैना को भी तत्काल जोड़ा जाए, ताकि क्षेत्र की प्यासी जनता को शुद्ध और मीठा पेयजल उपलब्ध हो सके। इन्दल सिंह ने वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकार द्वारा बन्ध बारैठा को पाँचना बाँध पाइप लाइन स्कीम से जोड़ने की स्वीकृति देकर निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है, जिससे बन्ध बारैठा में जल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होगी। उन्होंने तर्क दिया कि इस पाइप लाइन का विस्तार इन प्रभावित तहसीलों तक करना न केवल तकनीकी रूप से सुगम है, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी बेहद किफायती सिद्ध होगा।

क्षेत्र की भौगोलिक विषमताओं का चित्रण करते हुए किसान नेता ने बताया कि वैर और भुसावर का अधिकांश भू-भाग पथरीला, पहाड़ी और ऊँबड़-खाबड़ है, जिसके कारण भूमिगत जल स्तर रसातल में जा चुका है। स्थिति की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक हजार फीट गहरे पाताल तोड़ ट्यूबवैल खुदवाने के उपरांत भी पानी नसीब नहीं हो रहा है। इस संकट के कारण किसान बैंक और साहूकारों के कर्ज के जाल में निरंतर फंसते जा रहे हैं और सिंचाई के अभाव में उपजाऊ भूमि बंजर होने की कगार पर है। इन्दल सिंह जाट ने क्षेत्रीय भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि जहाँ एक ओर रूपवास, भरतपुर, डीग, कामां और नगर जैसे क्षेत्रों को 'भरतपुर-धौलपुर चम्बल पेयजल स्कीम' का लाभ मिल रहा है, वहीं वैर, भुसावर और हलैना क्षेत्र आज भी किसी स्थाई पेयजल योजना से पूरी तरह वंचित हैं। ग्रामीण वर्तमान में बूंद-बूंद पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रहे हैं और ऊंचे दामों पर पानी खरीदने को विवश हैं।

जल जीवन मिशन (जेजेएम) की विफलता पर तीखा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि गाँवों में इस मिशन के नाम पर करोड़ों रुपये व्यर्थ कर दिए गए, किंतु धरातल पर अधिकांश योजनाएं ठप्प पड़ी हैं। टंकियां और ट्यूबवैल सूखे पड़े हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और राजनेता इस ओर ध्यान देने के बजाय मौन साधे हुए हैं। इन्दल सिंह जाट ने घोषणा की है कि वे शीघ्र ही इस महत्वपूर्ण माँग को लेकर प्रमुख राजनेताओं और उच्चाधिकारियों से मुलाकात कर मांग पत्र सौंपेंगे। साथ ही, जनसमर्थन जुटाने हेतु वे इन तहसीलों के प्रत्येक गाँव का दौरा कर ग्रामीणों से सीधा संपर्क करेंगे। उन्होंने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि बन्ध बारैठा से इन क्षेत्रों को जोड़ने की स्थाई स्कीम जल्द नहीं बनाई गई, तो पीड़ित जनता चुप नहीं बैठेगी।

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