भरतपुर / जोधपुर। सूर्यनगरी जोधपुर की पावन धरा पर 09 से 11 जनवरी तक आयोजित हुआ तीन दिवसीय 'अंतरराष्ट्रीय माहेश्वरी महाकुंभ 2026' न केवल समाज की एकजुटता का प्रतीक बना, बल्कि राष्ट्र की प्रगति में माहेश्वरी समाज की अमिट भूमिका को भी रेखांकित कर गया। इस ऐतिहासिक समागम का भव्य शुभारंभ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा किया गया, जबकि समापन समारोह की गरिमा राजस्थान के माननीय राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने बढ़ाई। राष्ट्र निर्माण और सामाजिक सरोकारों के इस महामंच पर भरतपुर के जिला प्रतिनिधिमंडल ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। जिले से जिलाध्यक्ष ओ.पी. माहेश्वरी, महामंत्री मुकेश कुमार माहेश्वरी, होम्योपैथी चिकित्सालय के व्यवस्थापक प्रहलाद माहेश्वरी एवं अखिल भारतीय माहेश्वरी महासभा के कार्यकारी सदस्य आर.सी. गुप्ता (खटोड) ने इस वैश्विक आयोजन में सम्मिलित होकर भरतपुर का प्रतिनिधित्व किया।

इस महाकुंभ की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें 25 देशों और देश के 430 जिलों से लगभग 50,000 समाज बंधुओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान देश की राजनीति और न्यायपालिका की शीर्ष हस्तियों का जमावड़ा रहा, जिनमें केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, राजसमंद विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी, पद्मविभूषण श्रीमती राजश्री बिरला, उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश जे.के. माहेश्वरी, विधि आयोग के अध्यक्ष दीपक माहेश्वरी और हिमाचल प्रदेश के सेवानिवृत्त मुख्य सचिव श्रीकांत वाल्दी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में माहेश्वरी समाज के त्याग और राष्ट्र भक्ति की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने विशेष रूप से राम जन्मभूमि आंदोलन में अपने प्राणों की आहुति देने वाले कोठारी बंधुओं के बलिदान को याद करते हुए समूचे सदन को भावुक कर दिया। गृह मंत्री ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि मुगलों के कालखंड से लेकर आज तक देश के खजाने को भरने और अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में माहेश्वरी समाज का योगदान अतुलनीय है। इसी क्रम में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने एक महत्वपूर्ण तथ्य साझा करते हुए कहा कि यद्यपि माहेश्वरी समाज संख्या बल में कम है, लेकिन देश की कुल जीडीपी में इस समाज का लगभग 10 प्रतिशत का योगदान है, जो समाज की कार्यकुशलता और समर्पण का प्रमाण है। 'जहाँ नहीं पहुंचे रेलगाड़ी, वहां पहुंचे मारवाड़ी' की कहावत को उन्होंने इस समाज की जीवंतता का आधार बताया।

पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रेषित विशेष संदेश को पढ़कर सुनाया, जिसमें समाज की प्रगतिशीलता की सराहना की गई थी। इस महाकुंभ में भविष्य की तकनीक और नवाचारों पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। 12 विशाल डोम में लगाए गए करीब 750 स्टालों के माध्यम से एआई (AI), स्टार्टअप, ऑटोमोबाइल, रोबोटिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में नए विनिर्माण और आइडिया प्रदर्शित किए गए। आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी व्यवस्था और अनुशासन रहा। 'उतना ही लो थाली में, व्यर्थ न जाए नाली में' के संकल्प को इस कदर निभाया गया कि 50 हजार लोगों के तीन दिवसीय भोजन कार्यक्रम में मात्र 3 किलो जूठन भी एकत्रित नहीं हुई, जो वैश्विक आयोजनों के लिए एक मिसाल है।

कार्यक्रम के दौरान गृह मंत्री ने समाज के 'गौरव ग्रंथ' का विमोचन किया और इस उपलब्धि को चिरस्थायी बनाने के लिए एक विशेष डाक टिकट भी जारी किया गया। इसके अतिरिक्त रतन लाल डागा द्वारा कृषि पर लिखित पुस्तक का विमोचन हुआ। सामाजिक सरोकारों को आगे बढ़ाते हुए 2019 के अधिवेशन में लिए गए 'अपना घर' के संकल्प को भी सिद्धि प्राप्त हुई, जिसकी शुरुआत ओम जी सोनी द्वारा की गई। यह अंतरराष्ट्रीय महाकुंभ न केवल समाज की शक्ति का प्रदर्शन था, बल्कि यह संदेश भी था कि माहेश्वरी समाज राष्ट्र हित में अपने सर्वस्व समर्पण के लिए सदैव तत्पर है।

Pratahkal Newsroom

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