भरतपुर, 06 जनवरी। बच्चों के सुरक्षित भविष्य और उनके अधिकारों के संरक्षण की दिशा में भरतपुर जिले के उच्चैन ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत भैंसा में एक नई उम्मीद की किरण जगी है। सोमवार को ग्राम पंचायत स्थित भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केंद्र के प्रांगण में बाल संरक्षण समिति (PLCPC) की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें न केवल बाल सुरक्षा की चुनौतियों पर मंथन हुआ, बल्कि उपस्थित जनसमूह ने समाज से बाल विवाह की कुप्रथा को जड़ से मिटाने का दृढ़ संकल्प भी लिया। इस कार्यशाला का आयोजन प्रयत्न संस्था की ‘कवच परियोजना 2.0’ के तहत किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर बाल अधिकारों के प्रति सजगता लाना है।

बैठक की शुरुआत में पंचायत फैसिलिटेटर तेजवीर सिंह गडासिया ने बाल अधिकारों और उनकी सुरक्षा के विभिन्न आयामों पर गहरा प्रकाश डाला। उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि बाल विवाह, बाल श्रम, बाल तस्करी और स्कूल ड्रॉप-आउट जैसी समस्याएँ समाज के लिए एक गंभीर कलंक हैं। उन्होंने विशेष रूप से अनाथ बच्चों और भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों के प्रति संवेदनशीलता दिखाने की अपील करते हुए कहा कि बचपन की रक्षा करना हम सभी की नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है। इस दौरान उन्होंने बच्चों की मदद के लिए समर्पित चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 की उपयोगिता के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी, ताकि संकट की स्थिति में त्वरित सहायता सुनिश्चित की जा सके।

बैठक के दौरान सरपंच लीला देवी, ग्राम विकास अधिकारी मिथिलेश कुमारी और कनिष्ठ सहायक भोजपाल सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों की गरिमामय उपस्थिति रही। कार्यशाला में आंगनवाड़ी सहायिका, आशा सहयोगिनी संगीता सैनी और वार्ड पंचों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। तेजवीर सिंह गडासिया ने राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं जैसे छात्रवृत्ति योजना, पालनहार योजना, नैपकिन योजना, महिला लाडो प्रोत्साहन योजना और विवाह सुगम योजना के लाभों के बारे में विस्तार से बताया। साथ ही, ई-श्रमिक कार्ड और बच्चों की सुरक्षा के लिए ‘गुड टच-बैड टच’ जैसे विषयों पर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।

बैठक का सबसे भावुक और प्रेरणादायक क्षण वह रहा जब सभी उपस्थित सदस्यों और ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ और ‘बाल विवाह मुक्त राजस्थान’ बनाने की शपथ ली। उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने यह संकल्प दोहराया कि वे अपने क्षेत्र में किसी भी कीमत पर बाल विवाह नहीं होने देंगे और शिक्षा के साथ-साथ बच्चों के मानसिक व शारीरिक विकास के लिए खेलकूद को भी बढ़ावा देंगे। इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब प्रशासन, स्वयंसेवी संस्थाएं और ग्रामीण समुदाय एक मंच पर आते हैं, तो बाल अधिकारों की रक्षा का मार्ग और भी प्रशस्त हो जाता है। अंत में, सभी सदस्यों ने इस जागरूकता अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने के संकल्प के साथ बैठक का समापन किया।

Pratahkal Bureau

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