भरतपुर के सुभाष नगर में कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ
नेकी दरबार वाली गली में आयोजित ज्ञान यज्ञ के पहले दिन भागवताचार्य मनोज पंडित ने भागवत महात्म्य का वर्णन किया, 2 अप्रैल को होगा विशाल भंडारा।

भरतपुर। मुकेश कुमार राजस्थान के भरतपुर स्थित सुभाष नगर में अध्यात्म की अविरल धारा प्रवाहित हो उठी है। स्थानीय क्षेत्रवासियों के सहयोग से नेकी दरबार वाली गली में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का गुरुवार को अत्यंत भव्य और श्रद्धापूर्ण शुभारंभ हुआ। आयोजन की शुरुआत एक विशाल कलश शोभा यात्रा के साथ हुई, जिसमें जनसैलाब उमड़ पड़ा। सुबह 9 बजे गाजे-बाजे के साथ निकली इस यात्रा में सैकड़ों महिलाओं ने सिर पर मंगल कलश धारण कर और भक्ति गीतों का गायन कर संपूर्ण क्षेत्र को धर्ममय वातावरण में सराबोर कर दिया।
शोभा यात्रा का दृश्य अत्यंत मनोहारी रहा, जहाँ श्रद्धालु महिलाएं पारंपरिक पीत वस्त्रों में सुसज्जित होकर शामिल हुईं, वहीं पुरुष श्रद्धालुओं ने भी जयकारों के साथ अपनी सहभागिता दर्ज कराई। नगर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से भ्रमण करती हुई यह यात्रा वापस कथा स्थल पर पहुंची, जहाँ वैदिक मंत्रोच्चार और विधिवत पूजा-अर्चना के पश्चात श्रीमद्भागवत कथा का औपचारिक श्रीगणेश किया गया।
कथा के प्रथम सोपान पर व्यासपीठ से भागवताचार्य मनोज पंडित ने भागवत महात्म्य का विस्तार से विवेचन किया। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानव जीवन को सत्य, धर्म और अटूट भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करने वाली अमर प्रेरणा है। उन्होंने रेखांकित किया कि इस पावन कथा के श्रवण मात्र से मनुष्य के सांसारिक कष्टों का निवारण होता है और व्याकुल आत्मा को परम शांति की प्राप्ति होती है। भागवताचार्य ने जोर देकर कहा कि कथा का मूल उद्देश्य समाज में सेवा, परस्पर सहयोग और आध्यात्मिक चेतना का संचार करना है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे सात दिनों तक इस ज्ञान यज्ञ में अपनी आहुति देकर अपने जीवन को सार्थक बनाएं।
आयोजन समिति के अनुसार, कथा का प्रवाह प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक निरंतर जारी रहेगा। भक्ति का यह अनुष्ठान 1 अप्रैल को पूर्ण आहुति के साथ संपन्न होगा। इसके पश्चात, 2 अप्रैल को हनुमान जयंती के पावन अवसर पर विशाल भंडारे और प्रसादी वितरण का भव्य आयोजन किया जाएगा। कथा के शुभारंभ अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, युवक-युवतियां, बच्चे और बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालु उपस्थित रहे, जो इस धार्मिक समागम के प्रति अटूट आस्था का प्रमाण है।

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