भरतपुर। सुभाष नगर स्थित नेकी दरबार वाली गली में आयोजित संगीतमयी श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन भक्ति और ज्ञान की त्रिवेणी प्रवाहित हुई। भागवताचार्य पंडित मनोज ने अपनी ओजस्वी वाणी से सृष्टि निर्माण, ध्रुव चरित्र और प्रह्लाद की अडिग आस्था के साथ-साथ राजा परीक्षित को मिले श्राप के मार्मिक प्रसंग का वर्णन कर पांडल में उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को समर्पण और भक्ति मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया गया।

कथा वाचक पंडित मनोज ने आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए कहा कि संपूर्ण सृष्टि की रचना भगवान की एक अद्भुत लीला है, जिसमें संसार के प्रत्येक जीव का अपना विशेष महत्व समाहित है। बालक ध्रुव के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि किस प्रकार दृढ़ संकल्प और निस्वार्थ भक्ति के बल पर एक नन्हे बालक ने भगवान को प्राप्त कर ब्रह्मांड में अमर स्थान सुनिश्चित किया। यह प्रसंग आधुनिक जीवन में धैर्य, अटूट निष्ठा और लक्ष्य के प्रति समर्पण का जीवंत संदेश देता है। इसी क्रम में भक्त प्रह्लाद के चरित्र पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों और हिरण्यकश्यप जैसे अत्याचारी पिता के दमन के बावजूद जिसकी आस्था विचलित नहीं होती, उसकी रक्षा स्वयं भगवान करते हैं। प्रह्लाद की कथा यह सिद्ध करती है कि सच्ची श्रद्धा हर संकट पर विजय पाने का सामर्थ्य रखती है।

आयोजन के दौरान राजा परीक्षित के जन्म और उनके जीवन के महत्वपूर्ण मोड़ का वर्णन किया गया। पंडित मनोज ने बताया कि अभिमन्यु के पुत्र और अर्जुन के पौत्र परीक्षित का जन्म भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा से हुआ था। उनके जीवन के उस निर्णायक प्रसंग को सुनाया गया जब आखेट के दौरान प्यास और थकान से व्याकुल होकर परीक्षित ने ध्यानमग्न ऋषि के गले में मृत सर्प डाल दिया था। इस कृत्य से क्रोधित होकर ऋषि पुत्र ने उन्हें सात दिन के भीतर तक्षक नाग के डसने का श्राप दे दिया। इस प्रसंग के जरिए कथा वाचक ने चेतावनी दी कि अहंकार और असावधानी वश किया गया लघु अपराध भी जीवन में विनाशकारी परिणाम ला सकता है।

कथा के बीच प्रस्तुत हुए भजनों और मधुर संगीत ने संपूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। भक्ति के इस प्रवाह में महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे झूमने पर मजबूर हो गए। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 9 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुए हवन से हुई, जिसमें पंडित सुशील कुमार ने मुख्य परीक्षित दंपत्ति सहित अन्य भक्तों से आहुतियां दिलवाईं। आयोजकों ने जानकारी दी कि 28 मार्च को तीसरे दिन वामन अवतार की दिव्य झांकी सजाई जाएगी। यह कथा प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक आयोजित की जा रही है, जिसमें समस्त धर्मप्रेमी जनता से सम्मिलित होकर धर्म लाभ उठाने की अपील की गई है।

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