भरतपुर में श्री शिव सेवक समिति ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा धर्म और भक्ति के अद्भुत संगम का केंद्र बन गई है। कथा के दौरान व्यासपीठ से ज्योति शिखा दीदी ने माता सती और पार्वती के जन्म की दिव्य गाथा का भावपूर्ण वर्णन किया, जिससे पूरा वातावरण शिवमय हो गया। कथा व्यास ने विस्तार से बताया कि कैसे माता सती ने राजा दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव के अपमान के बाद योगाग्नि में अपना शरीर त्याग दिया था और तत्पश्चात हिमालय राज एवं माता मैना के घर पार्वती के रूप में अवतार लिया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह प्रसंग रहा। कथा के माध्यम से दर्शाया गया कि किस प्रकार कठोर तपस्या और अटूट समर्पण के बल पर माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया। विवाह की झांकी और मंगल गीतों के वर्णन ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, जिससे पंडाल में उपस्थित भक्तों ने भक्ति के उल्लास में डूबकर नृत्य और जयकारे लगाए। कथा व्यास ने इस प्रसंग को त्याग, तपस्या और श्रद्धा का प्रतीक बताते हुए भक्तों को धैर्य और सदाचार का संदेश दिया।

इस पावन अवसर पर श्री बिहारी जी मंदिर के महंत देवेंद्र भारद्वाज ने व्यासपीठ का पूजन कर कथा वाचक का सम्मान किया। महंत ने श्रद्धालुओं को सनातन संस्कृति और भक्ति के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। उल्लेखनीय है कि पुरुषोत्तम मास के इस विशेष काल में श्री शिव सेवक समिति ट्रस्ट द्वारा शमशानेश्वर महादेव के नित्य पूजन और रुद्राभिषेक का अनुष्ठान किया जा रहा है, जिसे शास्त्रों में अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। आयोजन के अंतिम चरण में श्रद्धालुओं ने जगत के कल्याण और सुख-समृद्धि की मंगल कामना की। यह कथा न केवल धार्मिक चेतना जगा रही है, बल्कि सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभा रही है।

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Umesh Lawania, Bharatpur

Umesh Lawania, Bharatpur

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