भरतपुर। लोहागढ़ की वीर धरा पर आज महाराजा सूरजमल के अजेय व्यक्तित्व और उनके ऐतिहासिक कृतित्व की गूँज सुनाई दी। अवसर था महारानी श्री जया (एमएसजे) राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में इतिहास विभाग के तत्वावधान में आयोजित 'इतिहास छात्र परिषद्' के विस्तार व्याख्यान का। विद्या की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुरू हुए इस बौद्धिक समागम ने विद्यार्थियों को भरतपुर के गौरवशाली अतीत से रूबरू कराया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. सुनीता पांडे ने की, जबकि विभाग प्रभारी प्रोफेसर डॉ. संतोष गुप्ता और मुख्य वक्ता के रूप में प्रख्यात इतिहासकार मानसिंह युवा ने मंच की गरिमा बढ़ाई।

मुख्य वक्ता इतिहासविद् मानसिंह युवा ने अपने ओजस्वी व्याख्यान में महाराजा सूरजमल को एक ऐसे योद्धा के रूप में चित्रित किया, जिन्हें रणभूमि में कभी पराजय का मुख नहीं देखना पड़ा। उन्होंने महाराजा के जीवन परिचय की परतों को खोलते हुए उनकी बहुआयामी उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। युवा ने विशेष रूप से भरतपुर के ऐतिहासिक किले का उल्लेख करते हुए बताया कि 19 फरवरी 1733 ईस्वी को इस अभेद्य दुर्ग की नींव रखी गई थी, जो अनवरत आठ वर्षों के कठिन परिश्रम के बाद बनकर तैयार हुआ। इतिहास के झरोखों से झांकते हुए उन्होंने महाराजा द्वारा लिखे गए विभिन्न मूल पत्रों के साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिससे विद्यार्थी तत्कालीन राजनीति और कूटनीति की बारीकियों को समझ सके।

इस शैक्षणिक उत्सव में केवल संवाद ही नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धा का भी संगम देखने को मिला। इतिहास छात्र परिषद् के अंतर्गत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। भाषण प्रतियोगिता में वीरपाल ने प्रथम, चेतना सिंह ने द्वितीय और हरेंद्र ने तृतीय स्थान प्राप्त कर अपनी वाकपटुता सिद्ध की। वहीं पोस्टर प्रतियोगिता में चेतना ने बाजी मारते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि वीरपाल और ललितेश क्रमशः दूसरे व तीसरे स्थान पर रहे। ज्ञान की परीक्षा यानी क्विज प्रतियोगिता में भी वीरपाल ने अपना दबदबा कायम रखते हुए प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि नरेंद्र सिंह को द्वितीय और चेतना सिंह को तृतीय स्थान मिला।

प्राचार्य डॉ. सुनीता पांडे ने विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत करते हुए छात्र परिषद् की प्रासंगिकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से न केवल विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन में सहायता मिलती है, बल्कि वे अपनी मिट्टी के इतिहास से भी जुड़ते हैं। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. सुमन गोयल द्वारा किया गया। इस गरिमामयी अवसर पर डॉ. संतोष गुप्ता, डॉ. मनोज सिनसिनवार, डॉ. प्रमोद कुमार, कविता वर्मा, डॉ. अमित रैकवार और मीडिया प्रभारी डॉ. अशोक कुमार गुप्ता सहित महाविद्यालय के अनेक संकाय सदस्य और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे, जिन्होंने इस ऐतिहासिक चर्चा को आत्मसात किया।

Mukesh Kumar, Bharatpur

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