भरतपुर, 3 जनवरी। भारतीय समाज में स्त्री शिक्षा की अलख जगाने वाली और रूढ़िवादिता की बेड़ियां काटकर महिलाओं के लिए ज्ञान के द्वार खोलने वाली देश की प्रथम महिला शिक्षिका, क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले की जयंती आज भरतपुर के जसवंत नगर में अत्यंत गरिमामय ढंग से मनाई गई। भीम भारत युवा संगठन द्वारा आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा और विचार गोष्ठी में समाज सुधार की उस महान नायिका को याद किया गया, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी। कार्यक्रम की अध्यक्षता संगठन के संरक्षक ओमप्रकाश शेखर ने की, जहाँ संगठन के सभी पदाधिकारियों ने सावित्रीबाई फुले के तैल चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता के रूप में विचार व्यक्त करते हुए संगठन के अध्यक्ष इंजीनियर जीतेन्द्र सिकरवार ने सावित्रीबाई फुले के संघर्षमयी जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने उस दौर में महिला शिक्षा की नींव रखी जब समाज में स्त्रियों का घर से निकलना भी वर्जित था। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन महिलाओं के उत्थान और उन्हें शिक्षित करने के लिए समर्पित कर दिया। सिकरवार ने रेखांकित किया कि आधुनिक भारत में शिक्षित महिलाओं की जो भी उपलब्धियां दिखती हैं, उसके मूल में सावित्रीबाई फुले का कठिन परिश्रम और साहस छिपा है।

संगठन के महामंत्री दीपक बंसीबाल ने सावित्रीबाई फुले के प्रारंभिक जीवन की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए बताया कि मात्र 9 वर्ष की आयु में विवाह होने के बाद उनके पति महात्मा ज्योतिबा फुले ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें पढ़ने के लिए निरंतर प्रेरित किया। यह उसी प्रेरणा का परिणाम था कि उन्होंने समाज के कड़े विरोध और पत्थर-गोबर फेंके जाने जैसी अपमानजनक स्थितियों को सहते हुए भी भारत में लड़कियों के लिए पहला स्कूल खोला।

इस विचार गोष्ठी में संगठन के प्रमुख सलाहकार रवि शेखर, सचिव एडवोकेट सुनील बंसीवाल, गीता देवी, मनु कुमारी, देवेंद्र सिंह, मनीष कुमार और अभय ने भी अपने ओजस्वी विचार साझा किए। सभी वक्ताओं ने एक सुर में कहा कि सावित्रीबाई फुले केवल एक शिक्षिका नहीं बल्कि एक सामाजिक क्रांति का नाम हैं, जिन्होंने जातिगत भेदभाव और लैंगिक असमानता के विरुद्ध युद्ध लड़ा। कार्यक्रम का समापन एक मजबूत संकल्प के साथ हुआ कि सावित्रीबाई फुले के शिक्षा और समानता के मिशन को प्रत्येक घर तक पहुँचाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

Pratahkal Bureau

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