भरतपुर: अब खेतों में बरसेगा 'नैनो' का जादू, इफको ने कुम्हेर में किसानों को सिखाया आधुनिक खेती का मंत्र
भरतपुर के कुम्हेर कृषि विज्ञान केंद्र में इफको द्वारा आयोजित किसान सभा में नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के क्रांतिकारी फायदों पर चर्चा की गई। संयुक्त निदेशक कृषि महिपाल सिंह और विशेषज्ञों ने 120 से अधिक किसानों को आधुनिक बीजोपचार और नैनो तकनीक से खेती करने के गुर सिखाए। जानिए कैसे यह तकनीक बदल सकती है किसानों की तकदीर और बढ़ा सकती है पैदावार।

भरतपुर/डीग। कृषि प्रधान भारत की तकदीर अब खेतों में पारंपरिक बोरियों से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक चमत्कार 'नैनो उर्वरकों' की बोतलों से बदलने वाली है। भरतपुर और डीग जिले की सीमाओं पर बसे कुम्हेर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में शुक्रवार को एक ऐसी ही किसान सभा का आयोजन हुआ, जिसने खेती की पारंपरिक सोच को नई दिशा देने का काम किया। इफको द्वारा आयोजित इस विशेष सत्र में आधुनिक कृषि तकनीक और नैनो उर्वरकों के बढ़ते प्रभाव पर गहरा मंथन किया गया, जिसमें क्षेत्र के कृषि विशेषज्ञों और सैकड़ों प्रगतिशील किसानों का संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाते हुए अध्यक्षता डीग जिले के संयुक्त निदेशक कृषि महिपाल सिंह ने की। उन्होंने किसानों का आह्वान करते हुए कहा कि बदलती जलवायु और घटते संसाधनों के बीच 'नैनो डीएपी' और 'नैनो यूरिया' मात्र विकल्प नहीं, बल्कि भविष्य की अनिवार्यता हैं। उन्होंने विभागीय अधिकारियों और किसानों को निर्देश दिए कि वे नैनो उर्वरकों का महत्व जन-जन तक पहुंचाएं और विशेष रूप से नैनो डीएपी के माध्यम से बीजोपचार की विधि का प्रदर्शन कर किसानों का भरोसा जीतें।
इफको भरतपुर के उप क्षेत्र प्रबंधक श्याम सुन्दर ने अपनी पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के जरिए विज्ञान और मिट्टी के मेल को बारीकी से समझाया। उन्होंने बताया कि किस तरह नैनो डीएपी और यूरिया न केवल फसलों की गुणवत्ता बढ़ाते हैं, बल्कि पर्यावरण को भी रासायनिक दुष्प्रभावों से बचाते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र कुम्हेर की विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका जोशी ने भी इस आधुनिक तकनीक की वकालत करते हुए कहा कि नैनो डीएपी के परिणाम अत्यंत उत्साहजनक रहे हैं और अब समय आ गया है कि इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि प्रत्येक किसान इसका लाभ उठा सके।
इस दौरान कृषि सुरक्षा के पहलुओं पर चर्चा करते हुए इफको एम सी जयपुर से आए ओमप्रकाश ने कीटनाशक दवाओं के सटीक उपयोग की जानकारी दी, वहीं कृष्ण कुमार ने इफको एम सी के नवीन उत्पादों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। सभा में ओमवीर सोलंकी सहित क्षेत्र के लगभग 120 सक्रिय किसानों ने भाग लिया, जिन्होंने तकनीक को अपनाने का संकल्प लिया। यह आयोजन केवल एक सभा मात्र नहीं था, बल्कि पूर्वी राजस्थान के कृषि परिदृश्य में एक नए वैज्ञानिक युग की दस्तक थी, जो आने वाले समय में लागत कम कर किसानों की आय दोगुनी करने का मार्ग प्रशस्त करेगी।

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