भरतपुर: अब भारी-भरकम कट्टों से मिलेगी आजादी, एक छोटी शीशी ने बदली किसानों की तकदीर! इफको ने दिया खेती का 'नया मंत्र'
भरतपुर के डीग-नगर में इफको ने किसानों को नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के जरिए खेती की लागत आधी करने का क्रांतिकारी तरीका बताया। इफको अधिकारी श्याम सुन्दर और संजय सिंह की मौजूदगी में आयोजित इस किसान सभा में बताया गया कि कैसे नैनो तकनीक से 50% डीएपी की बचत होगी और पैदावार बढ़ेगी। साथ ही ड्रोन से छिड़काव और संकट हरण बीमा योजना की जानकारी भी दी गई। भविष्य की खेती का यह नया अध्याय अन्नदाताओं के लिए वरदान साबित होगा।

भरतपुर: कृषि प्रधान देश में खेती की पुरानी तस्वीरें अब तेजी से बदल रही हैं और इस बदलाव का गवाह शनिवार को भरतपुर जिले का डीग क्षेत्र बना। यहाँ के नगर क्रय विक्रय सहकारी समिति परिसर में आयोजित एक भव्य किसान सभा में इफको ने खेती की दुनिया में आए उस क्रांतिकारी बदलाव का खाका खींचा, जिसने अन्नदाताओं की उम्मीदों को नई उड़ान दी है। इफको द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में पारंपरिक खेती के बोझ को कम करने और मुनाफे को दोगुना करने के वैज्ञानिक रहस्यों से पर्दा उठाया गया, जिसने वहां मौजूद हर किसान को सोचने पर मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण इफको के उप क्षेत्र अधिकारी श्याम सुन्दर द्वारा दी गई वह जानकारी रही, जिसने यह सिद्ध कर दिया कि अब भारी-भरकम कट्टों का दौर लदने वाला है। समिति प्रभारी संजय सिंह की विशेष उपस्थिति में आयोजित इस सत्र में अधिकारियों ने वैज्ञानिक तथ्यों के साथ समझाया कि कैसे नैनो तकनीक की एक छोटी सी बोतल पारंपरिक यूरिया और डीएपी के बोरों से कहीं अधिक प्रभावी साबित हो रही है। इफको ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि भविष्य की खेती का वह आधार है जो लागत को घटाकर सीधा मुनाफा बढ़ाएगा। श्याम सुन्दर ने बीज उपचार की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए किसानों को एक विशेष मंत्र दिया। उन्होंने बताया कि यदि फसल की बुआई के समय 5 मिली प्रति किलोग्राम की दर से नैनो डीएपी से बीजों को उपचारित किया जाए, तो न केवल अंकुरण की प्रक्रिया तेज होती है, बल्कि फसल की नींव भी बेहद मजबूत हो जाती है। यह प्रक्रिया पौधे के शुरुआती विकास में संजीवनी का काम करती है।
इस वैज्ञानिक परिचर्चा में सबसे चौंकाने वाला तथ्य दानेदार डीएपी की खपत को आधा करने का था। विशेषज्ञों ने बताया कि जब फसल 30 से 35 दिन की अवस्था में पहुँचती है, तब 5 मिली प्रति लीटर पानी के हिसाब से नैनो डीएपी का छिड़काव मिट्टी की उर्वरता और फसल के स्वास्थ्य में क्रांतिकारी परिवर्तन लाता है। इस पद्धति को अपनाकर किसान दानेदार डीएपी की खपत में 50 प्रतिशत तक की भारी बचत कर सकते हैं, जो सीधे तौर पर उनकी जेब पर पड़ने वाले बोझ को कम करता है और मिट्टी की सेहत को भी जहरमुक्त बनाता है। इसके अतिरिक्त, श्याम सुन्दर ने बताया कि फसल के एक माह के हो जाने पर नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का संयुक्त छिड़काव एक शक्तिशाली 'बूस्टर' की तरह कार्य करता है, जो पैदावार में अप्रत्याशित वृद्धि करने में सक्षम है।
सभा के दौरान इफको ने आधुनिक तकनीक के समावेश पर जोर देते हुए ड्रोन द्वारा नैनो यूरिया के छिड़काव की विधि का भी विस्तृत वर्णन किया, जो समय और श्रम दोनों की बचत का एक नायाब तरीका है। इसके साथ ही, किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने वाली इफको की 'संकट हरण बीमा योजना' के बारे में भी जागरूक किया गया। यह आयोजन केवल एक सूचना सत्र नहीं था, बल्कि क्षेत्र के किसानों को परंपरागत बेड़ियों से मुक्त होकर वैज्ञानिक खेती की ओर कदम बढ़ाने का एक सशक्त आह्वान था।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
