राज्य सरकार की संवेदनशीलता और जनकल्याणकारी नीतियों के फलस्वरूप संचालित 'मुख्यमंत्री कन्यादान योजना' प्रदेश के आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए वर्तमान में एक बड़ा सहारा सिद्ध हो रही है। भरतपुर जिले में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से अब तक 428 बेटियों के हाथ पीले करने में सरकार ने महत्वपूर्ण आर्थिक सहयोग प्रदान किया है, जिससे न केवल इन परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्राप्त हुई है, बल्कि उनके जीवन में सम्मानजनक बदलाव का सूत्रपात भी हुआ है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के संयुक्त निदेशक श्याम सुंदर शर्मा ने योजना की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि इसके अंतर्गत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अल्पसंख्यक वर्ग के बीपीएल परिवारों के साथ-साथ अन्य वर्गों के बीपीएल, अन्त्योदय परिवार और आस्था कार्डधारी परिवारों को लाभान्वित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त आर्थिक रूप से कमजोर विधवा महिलाओं की पुत्रियों, विशेष योग्यजन व्यक्तियों की कन्याओं, पालनहार योजना के लाभार्थियों तथा स्वयं महिला खिलाड़ियों के विवाह हेतु भी यह आर्थिक संबल प्रदान किया जाता है। योजना की अनिवार्यता के अनुसार लाभार्थी राजस्थान का मूल निवासी होना चाहिए और कन्या की आयु 18 वर्ष या उससे अधिक होनी आवश्यक है। यह लाभ एक परिवार की अधिकतम दो कन्याओं के विवाह तक ही सीमित रखा गया है। विधवा महिलाओं की पुत्रियों के संदर्भ में विशेष पात्रता निर्धारित है, जिसमें महिला का पुनर्विवाह न हुआ हो, वार्षिक आय 50 हजार रुपये से कम हो और परिवार में 25 वर्ष या उससे अधिक आयु का कोई अर्जनशील सदस्य मौजूद न हो।

योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता और प्रोत्साहन राशि की संरचना को स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि पात्र कन्याओं को 31 हजार रुपये से लेकर 51 हजार रुपये तक की राशि प्रदान की जाती है। अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अल्पसंख्यक वर्ग के बीपीएल परिवारों को 31 हजार रुपये की हथलेवा राशि दी जाती है, जबकि अन्य पात्र श्रेणियों को 21 हजार रुपये मिलते हैं। शिक्षा को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से इसमें अतिरिक्त लाभ भी जोड़े गए हैं, जिसके तहत 10वीं उत्तीर्ण कन्याओं को 10 हजार रुपये और स्नातक उत्तीर्ण कन्याओं को 20 हजार रुपये की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जाती है। भरतपुर जिले के आंकड़ों पर गौर करें तो गत दो वर्षों में कुल 428 कन्याओं के विवाह पर शासन द्वारा लगभग 1 करोड़ 96 लाख 13 हजार रुपये की सहायता राशि वितरित कर निर्धन परिवारों को बड़ा आर्थिक संबल प्रदान किया गया है।

योजना का लाभ लेने की प्रक्रिया को सरल बनाते हुए विभाग ने इसे डिजिटल माध्यम से जोड़ा है। इच्छुक आवेदक नजदीकी ई-मित्र केंद्र अथवा अपनी एसएसओ आईडी के माध्यम से एसएसओ राजस्थान पोर्टल sso.rajasthan.gov.in और sje.rajasthan.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह ध्यान रखना अनिवार्य है कि इस सहायता हेतु विवाह की तिथि से एक वर्ष के भीतर आवेदन प्रस्तुत करना आवश्यक है। सरकार की इस पहल ने समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को यह विश्वास दिलाया है कि बेटियों के विवाह की जिम्मेदारी में शासन उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।

Umesh Lawania, Bharatpur

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उमेश लावणिया भरतपुर से हमारे प्रतिष्ठित संवाददाता हैं। स्थानीय और राष्ट्रीय समाचारों के सटीक और समयनिष्ठ कवरेज के लिए उन्हें जाना जाता है। प्रात:काल न्यूज़ के पाठकों तक वे हमेशा सत्यनिष्ठ और प्रभावशाली खबरें पहुँचाते हैं। उनके लेख और रिपोर्टिंग में गहराई, स्पष्टता और भरोसेमंद जानकारी का समावेश रहता है, जो उन्हें हमारे न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म का एक अहम स्तंभ बनाता है।

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