भरतपुर: बीएसएनएल कार्यालय में भीषण अग्निकांड, संचार सेवाएं ठप्प और व्यवस्थाओं की खुली पोल
भरतपुर के कृष्णा नगर स्थित बीएसएनएल कार्यालय में शॉर्ट सर्किट से भीषण आग लगने से 1 लाख से अधिक मोबाइल और इंटरनेट कनेक्शन ठप्प हो गए हैं। नगर निगम ने खुलासा किया कि कार्यालय के पास फायर एनओसी नहीं थी और अग्निशमन यंत्र भी एक्सपायर थे। सब डिविजनल इंजीनियर प्रकाश शेखर और राजस्व अधिकारी तेजराम मीणा के बयानों के साथ पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

भरतपुर। शहर के व्यस्ततम इलाके कृष्णा नगर स्थित बीएसएनएल कार्यालय में आज उस समय कोहराम मच गया जब अचानक शॉर्ट सर्किट की वजह से ट्रांस्मिशन रूम आग के गोलों में तब्दील हो गया। इस भीषण अग्निकांड ने न केवल सरकारी संपत्ति को स्वाहा किया, बल्कि जिले की डिजिटल लाइफलाइन को भी पूरी तरह से काट कर रख दिया है। आग की लपटें इतनी भयावह थीं कि देखते ही देखते करीब 1 लाख से अधिक मोबाइल उपभोक्ता, फाइबर इंटरनेट सेवाएं और बैंकिंग लाइन्स पूरी तरह ठप्प हो गईं, जिससे पूरे शहर में संचार का संकट खड़ा हो गया।
घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब ट्रांस्मिशन रूम से धुएं का गुबार निकलने लगा। बीएसएनएल के सब डिविजनल इंजीनियर प्रकाश शेखर ने बताया कि आग का मुख्य कारण शॉर्ट सर्किट था। विभाग का दावा है कि आग लगते ही दमकल विभाग को सूचित किया गया था, लेकिन आरोप है कि दमकल की गाड़ियां करीब 45 मिनट से एक घंटे की देरी से पहुंचीं, जिससे आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। प्रकाश शेखर के अनुसार, प्रारंभिक तौर पर भारी नुकसान की आशंका है, लेकिन बिल्डिंग के भीतर जाकर पूरी जांच के बाद ही वास्तविक क्षति का आंकलन संभव हो पाएगा।
दूसरी ओर, प्रशासन और नगर निगम की जांच में विभाग की गंभीर लापरवाही सामने आई है। नगर निगम के राजस्व अधिकारी तेजराम मीणा ने मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए खुलासा किया कि बीएसएनएल कार्यालय के पास न तो अनिवार्य फायर एनओसी (NOC) थी और न ही वहां लगे अग्निशमन यंत्र कार्यशील स्थिति में थे। जांच में पाया गया कि कार्यालय में मौजूद फायर इक्विपमेंट काफी समय पहले ही एक्सपायर हो चुके थे। इसी अनियमितता और यूडी टैक्स जमा न करने के कारण नगर निगम ने पहले ही बिल्डिंग को सीज करने का नोटिस थमा रखा था।
राहत और बचाव कार्य की जानकारी देते हुए तेजराम मीणा ने बताया कि निगम को दोपहर करीब 2 बजे सूचना मिली थी, जिसके बाद 10 मिनट के भीतर चार दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंच गई थीं। आग की तीव्रता को देखते हुए नदबई, उच्चैन और कुम्हेर से भी दमकलें बुलाई गईं। करीब 15 फेरे लगाने और 2 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। इस घटना ने सरकारी महकमों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर कर दिया है। जहां एक ओर विभाग नुकसान की गणना में जुटा है, वहीं हजारों उपभोक्ता संचार सेवाओं के बहाल होने का इंतजार कर रहे हैं। यह अग्निकांड भविष्य के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है।

Pratahkal Bureau
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