स्वाभिमान के प्रतीक और अदम्य साहस की जीवंत गाथा, महाराणा प्रताप की जयंती के अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, भरतपुर इकाई द्वारा बृजनगर स्थित एक विद्यालय में 'चित्तौड़ विजय गौरव दिवस' एवं भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के शौर्य को नमन करने और उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामदास शर्मा ने की, जबकि रामलीला समिति के अध्यक्ष एवं शिक्षाविद ब्रजेश कौशिक मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी ब्रजेंद्र कौंतेय और कृष्ण विनोद ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।

गोष्ठी का विधिवत शुभारंभ वरिष्ठ ओज कवि पूरन शर्मा द्वारा मां शारदे की वंदना के साथ हुआ। तत्पश्चात, कवियों और साहित्यकारों ने महाराणा प्रताप के जीवन संघर्ष, उनके अदम्य शौर्य और मातृभूमि के प्रति उनके अटूट प्रेम को अपनी रचनाओं के माध्यम से अभिव्यक्त किया। सुरेश शर्मा, जवाहर लाल कटारा, सीएस कृष्णा, डॉ. कृष्ण कन्हैया, राजेंद्र अनुरागी, लोकेश सिंघल, राकेश राजस्थानी और श्यामसिंह जघीना जैसे कवियों ने अपनी ओजस्वी कविताओं के माध्यम से उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। परिषद् अध्यक्ष हरिओम हरि और महामंत्री नरेंद्र निर्मल ने अपनी काव्य रचनाओं के माध्यम से महाराणा प्रताप को श्रद्धांजलि अर्पित की और राजस्थान की वीर प्रसूता भूमि को नमन किया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार गुप्ता ने अपने संबोधन में महाराणा प्रताप के स्वाभिमानपूर्ण जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने कभी किसी की अधीनता स्वीकार नहीं की। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन आज भी देश की रक्षा के लिए प्रेरणा का एक अखंड स्रोत है। मुख्य अतिथि ब्रजेश कौशिक ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि उस कठिन समय में जब कई राजाओं ने अकबर की अधीनता स्वीकार की थी, तब महाराणा प्रताप ने स्वाभिमान का जो दीप जलाया, वह आज भी पूरे राष्ट्र को गौरवान्वित करता है। उन्होंने समकालीन परिस्थितियों में देश के स्वाभिमान को बढ़ाने के लिए महाराणा प्रताप जैसे संकल्पवान व्यक्तित्व की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. रामदास शर्मा ने महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं का स्मरण करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की। इस आयोजन में कैप्टन सुखराम सिंह, ब्रजभूषण शर्मा, अभिषेक शर्मा, मोहित शर्मा, अजनेश चौधरी, रेखा शर्मा और सरोज शर्मा सहित अनेक प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे। संचालन नरेंद्र निर्मल द्वारा किया गया, जबकि समापन पर परिषद के संरक्षक प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार गुप्ता ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। यह आयोजन महाराणा प्रताप की गौरव गाथा को संजोने और उनके त्याग को युगों-युगों तक जीवंत रखने के संकल्प के साथ संपन्न हुआ।

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