भरतपुर – शहर की जीवनदायिनी कही जाने वाली सुजान गंगा नहर में ऑक्सीजन की कमी के चलते मछलियों की मौत का मामला सामने आया है। प्रतिवर्ष इस नहर में पानी की गुणवत्ता और ऑक्सीजन की कमी के कारण मछलियों की मौत की घटनाएँ होती रही हैं। इस बार भी स्थिति गंभीर होने के कारण नगर निगम ने राहत एवं सफाई अभियान शुरू कर दिया है।

नगर निगम आयुक्त श्रवण कुमार विश्नोई ने बताया कि मृत मछलियों की सूचना मिलते ही तुरंत कार्रवाई की गई। मृत मछलियों को बाहर निकालने का ठेका दिया गया है और पानी में ऑक्सीजन की कमी को दूर करने के लिए फव्वारे चालू किए जाएंगे। आयुक्त ने कहा कि बीडीए के साथ समन्वय कर फव्वारों को 8 से 10 घंटे तक चलाया जाएगा, जिससे पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ सके और मछलियों को बचाया जा सके।

स्थानीय निवासी साबिर खान ने बताया कि मृत मछलियों को भतीजे सोनू कुरैशी के माध्यम से बाहर निकाला गया। नहर में जमी गंदगी और कचरा पानी को दूषित कर रहा है, जिससे ऑक्सीजन की कमी हो रही है और मछलियों की मौत हो रही है। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 5 से 6 क्विंटल मछलियों को बाहर निकालकर दफनाया गया है। साथ ही उन्होंने नगर निगम से अनुरोध किया कि नहर से दूषित पानी को बाहर निकालकर शुद्ध पानी भरा जाए और फव्वारों को नियमित रूप से चालू रखा जाए।

विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों में पानी की ऊपरी परत जमने से भी नहर के अंदर ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। इसके अलावा, नहर में जमी गंदगी और कचरा लगातार पानी की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है। नगर निगम और बीडीए के संयुक्त प्रयासों से अब तक मछलियों के जीवन को बचाने और पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

सुजान गंगा नहर का यह मामला न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से चिंताजनक है, बल्कि शहर की पारिस्थितिकी और स्थानीय जलजीवन के लिए भी गंभीर संदेश देता है। नगर प्रशासन की समय पर कार्रवाई और निगरानी ही ऐसी घटनाओं को भविष्य में रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

Pratahkal Bureau

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