भरतपुर में जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा बैठक, कलक्टर ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही पर दिए सख्त निर्देश
भरतपुर में जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा बैठक के दौरान जिला कलक्टर कमर चौधरी ने स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं, हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की निगरानी, टीकाकरण, टीबी नियंत्रण, डेंगू रोकथाम और 15 अगस्त के रक्तदान शिविर को लेकर अधिकारियों को महत्वपूर्ण निर्देश दिए।

तस्वीर में भरतपुर कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारी चर्चा करते हुए नजर आ रहे हैं।
भरतपुर, 31 जुलाई। जिला कलक्टर कमर चौधरी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की सभी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक समयबद्ध एवं प्रभावी रूप से पहुंचना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अधिकारियों को टीम भावना के साथ कार्य करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में लगातार सुधार लाने के निर्देश दिए, ताकि आमजन को बेहतर, सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिला कलक्टर ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कार्यक्रमों और जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की।
उन्होंने निर्देश दिए कि सभी योजनाओं की प्रगति समय पर संबंधित पोर्टलों पर अपलोड की जाए, जिससे जिले की राज्य स्तरीय रैंकिंग प्रभावित न हो। उन्होंने प्रत्येक हाई रिस्क गर्भवती महिला की समय पर पहचान, नियमित फॉलोअप, आवश्यक जांच एवं उपचार सुनिश्चित करने तथा सुरक्षित संस्थागत प्रसव को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
बैठक में जननी सुरक्षा योजना, राजश्री योजना एवं लाडो प्रोत्साहन योजना के तहत लाभार्थियों को देय प्रथम एवं द्वितीय किश्त के भुगतान की समीक्षा भी की गई। जिला कलक्टर ने लंबित प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण कर समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने मरम्मत योग्य चिकित्सा संस्थानों के भवनों के लिए एस्टीमेट तैयार कर भेजने तथा जर्जर एवं क्षतिग्रस्त भवनों के पुनर्निर्माण और नए चिकित्सा भवनों के प्रस्ताव शीघ्र तैयार करने को कहा।
उन्होंने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को निर्देश दिए कि बयाना ब्लॉक के खेड़ली गड़ासिया सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भवन की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण किया जाए। वहीं बंध बारैठा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के पुनर्निर्माण का प्रस्ताव तत्काल भेजने के निर्देश भी दिए।
मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए जिला कलक्टर ने हॉटस्पॉट क्षेत्रों की पहचान कर साप्ताहिक एंटी-लार्वा गतिविधियां, सर्वे, मलेरिया स्लाइड संग्रह, जनजागरूकता अभियान तथा लार्वा नियंत्रण कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं, उन्हें 24×7 डिलीवरी प्वाइंट के रूप में विकसित किया जाए और कोई भी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र संस्थागत प्रसव के मामले में शून्य नहीं रहना चाहिए।
बैठक के दौरान जिला कलक्टर ने कहा कि रक्तदान मानव सेवा का सर्वोत्तम माध्यम है। उन्होंने बयाना क्षेत्र में रक्तदान शिविर आयोजित करने के लिए उपखंड अधिकारी के साथ समन्वय स्थापित करने तथा जरूरतमंद मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने के लिए रक्त वितरण की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने आगामी 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में जिला मुख्यालय पर आयोजित होने वाले रक्तदान शिविर के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने को भी कहा।
उन्होंने छूटे हुए बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं का शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करने, मुख्यमंत्री निःशुल्क जांच एवं दवा योजना के तहत सभी चिकित्सा संस्थानों में आवश्यक दवाओं एवं जांच सुविधाओं की उपलब्धता बनाए रखने तथा राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत टीबी रोगियों की शीघ्र पहचान, समय पर उपचार एवं निक्षय पोषण योजना का लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया एवं अन्य मौसमी बीमारियों की रोकथाम की समीक्षा भी की गई। आरबीएसके कार्यक्रम के अंतर्गत जिले की सभी आंगनबाड़ी एवं विद्यालयों के बच्चों की शत-प्रतिशत स्वास्थ्य जांच, चिन्हित बच्चों का समय पर उपचार तथा एनीमिया एवं कुपोषण नियंत्रण के लिए गर्भवती महिलाओं, किशोर-किशोरियों एवं स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों की नियमित स्क्रीनिंग कर आवश्यकता अनुसार आयरन-फोलिक एसिड (आईएफए) की गोलियां उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
जिला कलक्टर ने पर्याप्त स्टाफ, भवन एवं आवश्यक उपकरणों से युक्त चिकित्सा संस्थानों का चयन कर उन्हें राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन (एनक्यूएएस) के तहत प्रमाणित कराने के निर्देश दिए। इसके लिए संबंधित स्टाफ का प्रशिक्षण एवं आमुखीकरण सुनिश्चित करने को भी कहा। उन्होंने सभी खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक गर्भवती महिला का 12 सप्ताह के भीतर पंजीकरण, समय पर चार प्रसव पूर्व जांच, आधार, जनआधार एवं बैंक खाते का विवरण दर्ज करने के साथ सुरक्षित संस्थागत प्रसव की पूर्व योजना तैयार की जाए। हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी करते हुए समय पर उपचार एवं रेफरल सुनिश्चित किया जाए, ताकि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाई जा सके।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. गौरव कपूर ने विभाग की उपलब्धियों एवं विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, संस्थागत प्रसव, नियमित टीकाकरण, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों एवं जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी संचालन के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
बैठक में एडीएम सिटी राहुल सैनी, डिप्टी सीएमएचओ डॉ. असित श्रीवास्तव, डॉ. बीएल मीणा, पीएमओ डॉ. नगेन्द्र भदौरिया, डॉ. अमरसिंह सहित अन्य चिकित्सा अधिकारी मौजूद रहे। समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, समयबद्ध क्रियान्वयन, जवाबदेही और जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया।

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