धौलपुर/भरतपुर। आधुनिक कृषि तकनीक और उन्नत उर्वरकों के समन्वय से किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प के साथ धौलपुर जिले के ग्राम विशेती पुरा में एक भव्य किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (इफको) द्वारा आयोजित इस संगोष्ठी ने क्षेत्र के किसानों के लिए भविष्य की खेती की नई राहें खोल दी हैं। कार्यक्रम में तकनीक और परंपरा के संगम ने खेती की लागत कम करने और पैदावार बढ़ाने के वैज्ञानिक तरीकों पर गहराई से प्रकाश डाला।

इस महत्वपूर्ण गोष्ठी में इफको के डिप्टी फील्ड मैनेजर श्याम सुंदर (भरतपुर/धौलपुर) ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। उनके साथ इफको एमसी से ओमप्रकाश चौधरी एवं कृष्णन कुमार (धौलपुर) भी उपस्थित रहे, जिन्होंने किसानों को बाजार और सुरक्षा के पहलुओं से अवगत कराया। कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाते हुए एमडी राहुल सिंह परिहार, करीमपुर से एस.एस. डांगुर व शेर सिंह डांगुर, तथा नैनो विलेज से उदयवीर भी मंच पर मौजूद रहे। करीब 50 से अधिक प्रगतिशील किसानों की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को एक जन-आंदोलन का रूप दे दिया।

मंच से संबोधित करते हुए डिप्टी फील्ड मैनेजर श्याम सुंदर ने नैनो तकनीक को खेती का भविष्य बताया। उन्होंने इफको के क्रांतिकारी उत्पादों जैसे नैनो डीएपी, नैनो यूरिया, सागरिका, नैनो जिंक और नैनो कॉपर के उपयोग पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने विशेष रूप से गेहूं, सरसों और बाजरा जैसी प्रमुख फसलों के लिए नैनो डीएपी के बीज उपचार को 'संजीवनी' करार दिया। किसानों को सलाह दी गई कि गेहूं की बुवाई से पूर्व 100 किलोग्राम बीज में नैनो डीएपी की एक पूरी बोतल मिलाकर उसे 30 मिनट तक छांव में सुखाएं, जिससे फसल की नींव मजबूत हो सके।

वैज्ञानिक पद्धतियों पर जोर देते हुए उन्होंने बताया कि गेहूं की फसल में पहले पानी के समय ही दानेदार यूरिया का प्रयोग करना चाहिए। जब फसल 35 से 40 दिन की अवस्था में पहुँच जाए, तब दानेदार यूरिया के बजाय नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और सागरिका का स्प्रे करना अधिक लाभकारी होता है। इस प्रक्रिया से न केवल वायु, जल और मिट्टी के प्रदूषण में कमी आती है, बल्कि फसलों के गिरने का खतरा भी कम हो जाता है। इसके अलावा, इससे उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार होता है और पौधों की जड़ों का विस्तार अधिक गहराई तक होता है।

गोष्ठी का एक मुख्य आकर्षण ड्रोन तकनीक का प्रदर्शन रहा। इफको द्वारा ड्रोन के माध्यम से नैनो यूरिया के छिड़काव की सुगमता और इससे होने वाले समय व धन की बचत के बारे में किसानों को लाइव जानकारी दी गई। साथ ही, किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इफको की 'संकट हरण बीमा योजना' के बारे में भी विस्तार से बताया गया। अंत में, उपस्थित किसानों ने इन आधुनिक तकनीकों को अपनाने का सामूहिक संकल्प लिया और इफको की इस पहल को कृषि क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव माना।

Pratahkal Bureau

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