राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, सुभाष चन्द्र बोस और भगतसिंह, जिन्होंने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर देश को आज़ादी दिलाई, आज उनके प्रतीकों और स्मृति स्थलों का संरक्षण प्रशासन की प्राथमिकता से बाहर होता नजर आ रहा है। भरतपुर जिले के बयाना उपखंड के ऐतिहासिक गांधी चौक, सुभाष चौक और भगतसिंह सर्किल से सामने आई तस्वीरें नगर पालिका और प्रशासनिक सतर्कता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रही हैं।

गांधी चौक स्थित गांधी जी के चबूतरे के सामने और उसके आसपास सब्जी की क्रेटें और बोरियां रखी गई हैं। यह स्थिति न केवल गांधी जी की प्रतिमा की गरिमा को ठेस पहुंचा रही है, बल्कि आमजन के आवागमन को भी बाधित कर रही है। चबूतरे के पास भारी मात्रा में अतिक्रमण स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

इसी तरह सुभाष चौक और भगतसिंह सर्किल क्षेत्र में ठेले और अवैध मोटरसाइकिल युक्त रिक्शा चालकों ने सर्किल को चारों ओर से घेर रखा है। मार्ग में हो रहे अतिक्रमण के कारण वाहनों के आवागमन में भारी समस्या उत्पन्न हो रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है—प्रशासन या नगर पालिका।

अतिक्रमण हटाना और सार्वजनिक स्थलों की गरिमा बनाए रखना नगर पालिका की प्राथमिक जिम्मेदारी है, लेकिन यहां स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे इस अतिक्रमण को लेकर ‘चौथ वसूली’ जैसे सवाल भी उठ रहे हैं, या फिर अधिकारी जानबूझकर इस ओर से आंखें मूंदे हुए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो ये स्थान पूरी तरह अवैध कब्जे की चपेट में आ जाएंगे। प्रशासनिक सुस्ती न केवल कानून व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगाती है, बल्कि महापुरुषों के आदर्शों के प्रति अनादर को भी दर्शाती है।

इस संबंध में ईओ नगरपालिका अनीता कुशवाहा ने कहा कि गलत तरीके से वाहन या ढेला खड़ा करने वालों के खिलाफ जल्द ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई कब और किस स्तर पर होती है, इस पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

Pratahkal Bureau

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