बयाना: पाइपलाइन लीकेज से सड़क बनी दलदल, ग्रामीणों में रोष
ब्रह्मबाद गांव की धाकड़ बस्ती में पेयजल पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है, जिससे घरों में सीलन और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

बयाना उपखंड के ब्रह्मबाद गांव की धाकड़ बस्ती में क्षतिग्रस्त पाइपलाइन के कारण सड़क पर जमा पानी और कीचड़ के बीच से गुजरते दोपहिया वाहन चालक।
बयाना। एक ओर सरकार जल संरक्षण और पानी बचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर बड़े-बड़े जागरूकता अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार महकमों की उदासीनता इस मुहिम को सरेआम ठेंगा दिखा रही है। ताजा मामला बयाना उपखंड के गांव ब्रह्मबाद की धाकड़ बस्ती से सामने आया है, जहाँ जलदाय विभाग की घोर लापरवाही के चलते पेयजल पाइपलाइन लीकेज की समस्या लगातार गंभीर और भयावह रूप धारण करती जा रही है। मुख्य पाइपलाइन कई स्थानों से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है, जिसके कारण हर बार पानी की सप्लाई शुरू होते ही तेज बहाव के साथ हजारों लीटर शुद्ध पेयजल व्यर्थ बहकर सड़क मार्ग पर जमा हो रहा है। विभाग की इस प्रशासनिक शिथिलता के कारण पूरी सड़क अब कीचड़ और गहरे दलदल में तब्दील हो चुकी है, जिसने स्थानीय निवासियों और राहगीरों का जीना मुहाल कर दिया है। बावजूद इसके, कुंभकर्णी नींद सो रहा जलदाय विभाग इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान देने को कतई तैयार नहीं है।
स्थानीय त्रस्त नागरिकों का कहना है कि धाकड़ बस्ती में लंबे समय से पाइपलाइन लीकेज का यह दौर अनवरत जारी है। जैसे ही नलों में पानी की आपूर्ति की जाती है, वैसे ही पानी सड़कों को जलमग्न कर देता है। मार्ग पर लगातार पानी भरा रहने और निकासी की उचित व्यवस्था न होने से पूरी सड़क टापू बन गई है, जिससे लोगों का पैदल चलना तक दूभर हो गया है। इस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों लोग गुजरते हैं, जिनमें से दोपहिया वाहन चालक आए दिन कीचड़ में फिसलकर गंभीर रूप से चोटिल हो रहे हैं। इस अव्यवस्था की सबसे बड़ी मार स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को झेलनी पड़ रही है, जिन्हें इस बदबूदार गंदगी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों ने रोष जताते हुए बताया कि विभागीय अधिकारियों को कई बार लिखित और मौखिक रूप से शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन अधिकारियों की संवेदनहीनता के कारण अब तक क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की मरम्मत के लिए एक भी कदम नहीं उठाया गया है। इस प्रशासनिक उदासीनता को लेकर पूरी बस्ती के लोगों में विभाग के प्रति भारी आक्रोश व्याप्त है।
समस्या की गंभीरता को रेखांकित करते हुए स्थानीय निवासी श्रीराम धाकड़ ने बताया कि सड़क पर चौबीसों घंटे पानी जमा रहने के कारण अब आसपास के घरों में सीलन की गंभीर समस्या पैदा हो गई है। रिहाइशी मकानों की दीवारों में लगातार नमी आ रही है, जिससे भविष्य में मकानों के ढहने और बड़े नुकसान की आशंका बढ़ गई है। इसके साथ ही, जमा पानी और सड़ते कीचड़ से पूरी बस्ती में असहनीय बदबू फैल रही है, जिससे मच्छरों का प्रकोप अत्यधिक बढ़ गया है। इसके परिणामस्वरूप क्षेत्र में महामारी और घातक बीमारियां फैलने का खतरा लगातार मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जब मानसून और बरसात के आगमन से पहले ही हालात इतने बदतर और नारकीय हो चुके हैं, तो आगामी दिनों में भारी बारिश के दौरान स्थिति कितनी भयावह और जानलेवा हो जाएगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
इस विकट स्थिति को देखते हुए स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन और जलदाय विभाग के उच्चाधिकारियों से पुरजोर मांग की है कि धाकड़ बस्ती की इस क्षतिग्रस्त मुख्य पाइपलाइन को युद्धस्तर पर तुरंत दुरुस्त कराया जाए, ताकि राष्ट्रीय संपत्ति माने जाने वाले पानी की बर्बादी को रोका जा सके और आम जनता को इस नारकीय जीवन से मुक्ति मिल सके। इसके साथ ही सड़क पर जमे कीचड़ व गंदे पानी की तुरंत सफाई करवाकर आवागमन को सुचारु बनाने की मांग की गई है। ग्रामीणों ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इस गंभीर समस्या का स्थाई समाधान नहीं किया, तो समस्त क्षेत्रवासी जलदाय विभाग के खिलाफ उग्र प्रदर्शन और आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी स्वयं शासन-प्रशासन की होगी।

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