बयाना (भरतपुर)। राजस्थान के चिकित्सा क्षेत्र में इन दिनों एक नए सरकारी फरमान ने हलचल मचा दी है, जिसके विरोध की गूँज अब बयाना की गलियों से लेकर प्रशासन के गलियारों तक सुनाई दे रही है। मेडिकल स्टोर खोलने और पुराने लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए 'कॉमर्शियल नक्शा' अनिवार्य किए जाने के नियम ने हजारों फार्मासिस्टों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। इसी संकट के समाधान और नियम को वापस लेने की मांग को लेकर राजस्थान फार्मासिस्ट संघ ने एक निर्णायक कदम उठाते हुए बिगुल फूंक दिया है।

गुरुवार को बयाना उपखंड कार्यालय में भारी गहमागहमी देखी गई, जहाँ राजस्थान फार्मासिस्ट संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में दवा विक्रेता और फार्मासिस्ट एकत्रित हुए। संघ ने मुख्यमंत्री और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन बयाना उपखंड अधिकारी (SDO) दीपक मित्तल को सौंपा। फार्मासिस्टों का तर्क है कि राज्य सरकार का यह नया नियम अव्यावहारिक है, क्योंकि प्रदेश की अधिकांश पुरानी और छोटी दवा दुकानें रिहायशी इलाकों या पुराने बाजारों में स्थित हैं, जिनके पास वर्तमान मानकों के अनुरूप कॉमर्शियल नक्शा उपलब्ध होना लगभग असंभव है। इस नियम के लागू होने से न केवल नए युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बंद होंगे, बल्कि वर्षों से सेवा दे रहे मौजूदा दवा विक्रेताओं के लाइसेंस भी रद्द होने की कगार पर पहुँच जाएंगे।

ज्ञापन सौंपने के दौरान केमिस्टों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने इस नीतिगत निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार नहीं किया, तो यह विरोध केवल ज्ञापन तक सीमित नहीं रहेगा। फार्मासिस्ट संघ ने दोटूक चेतावनी दी है कि यदि इस शर्त को वापस नहीं लिया गया, तो प्रदेश व्यापी स्तर पर उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन की होगी। इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने की प्रक्रिया में क्षेत्र के प्रमुख केमिस्ट भरत धाकड़, सुशील शर्मा, अर्जुन सौंकिया, प्रकाश गुर्जर, कैलाश गुर्जर, गुलाब चंद, विष्णु, नवीन सोनी, विनोद कुमार और जीतू सहित फार्मासिस्ट समुदाय के कई गणमान्य सदस्य सक्रिय रूप से मौजूद रहे। यह मामला अब केवल एक प्रशासनिक आदेश का नहीं, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले दवा विक्रेताओं के अस्तित्व की लड़ाई बन गया है।

Pratahkal Bureau

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