सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की पालना सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुक्रवार को बयाना स्थित उपकारागृह में विजिटर्स बोर्ड ने औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बोर्ड के सदस्यों ने बंदियों से सीधे संवाद स्थापित कर जेल में उपलब्ध सुविधाओं, व्यवहार और सामाजिक समानता से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान बंदियों से विशेष रूप से यह जानने का प्रयास किया गया कि क्या जेल परिसर में उनके साथ किसी प्रकार का जातिगत भेदभाव किया जाता है। इस पर सभी बंदियों ने एकमत होकर बताया कि उनके साथ समान व्यवहार किया जाता है तथा जेल में किसी भी प्रकार का जातिगत भेदभाव नहीं किया जा रहा है।

यह निरीक्षण सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 3 अक्टूबर 2024 को पारित सुकन्या सान्था बनाम भारत संघ मामले के आदेशों की पालना के तहत किया गया, जिसमें देशभर की जेलों में जातिगत भेदभाव और समानता से जुड़े मुद्दों की निगरानी के निर्देश दिए गए थे। न्यायालय ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों और विजिटर्स बोर्ड को जेलों का नियमित निरीक्षण कर स्थिति की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण भरतपुर के निर्देशानुसार ताल्लुका विधिक सेवा समिति बयाना के अध्यक्ष एवं अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश संख्या-1 प्रदीप कुमार ने विजिटर्स बोर्ड के सदस्यों के साथ उपकारागृह का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान बंदियों के रहन-सहन, भोजन व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधाओं तथा मानवाधिकारों से संबंधित व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने जेल प्रशासन को निर्देशित किया कि बंदियों के अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा सभी व्यवस्थाओं का संचालन मानवीय और संवेदनशील दृष्टिकोण के साथ किया जाए। उन्होंने सामाजिक समानता और सम्मानजनक व्यवहार को जेल प्रशासन की प्राथमिकता बनाए रखने पर भी जोर दिया।

इस अवसर पर एसडीएम दीपक मित्तल, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बयाना की प्राचार्य बबीता जैन, समाज कल्याण अधिकारी गजेंद्र सिंह, कृषि विभाग के अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता सतीश सिंघल, पैनल अधिवक्ता लोकेश कौशिक एवं वंदना तनेजा उपस्थित रहे। वहीं जेलर केदारनाथ शर्मा, नर्सिंग ऑफिसर चंद्रप्रकाश उपाध्याय सहित जेल प्रशासन का स्टाफ भी मौजूद रहा।

बयाना उपकारागृह में किया गया यह निरीक्षण केवल व्यवस्थाओं की समीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जेलों में समानता, गरिमा और संवैधानिक अधिकारों की सुनिश्चितता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप ऐसे निरीक्षण भविष्य में भी जेल प्रशासन की जवाबदेही और पारदर्शिता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

Pratahkal Bureau

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