बयाना: अधिकारों की हुंकार, जयपुर महारैली में शक्ति प्रदर्शन को ग्राम विकास अधिकारियों ने कसी कमर
बयाना पंचायत समिति के ग्राम विकास अधिकारियों ने 12 जनवरी को जयपुर में होने वाली 'चेतावनी महारैली' को लेकर हुंकार भरी है। अध्यक्ष प्रदीप कुमार के नेतृत्व में हुई बैठक में वेतन विसंगति, पुरानी पेंशन और निजीकरण जैसे मुद्दों पर चर्चा कर सामूहिक अवकाश का ज्ञापन सौंपा गया। कर्मचारियों ने मांगों की अनदेखी पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

बयाना। राजस्थान के प्रशासनिक तंत्र की रीढ़ माने जाने वाले ग्राम विकास अधिकारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बयाना पंचायत समिति क्षेत्र के ग्राम विकास अधिकारियों ने अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के आह्वान पर 12 जनवरी को जयपुर में आयोजित होने वाली 'चेतावनी महारैली' को सफल बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया। यह बैठक केवल चर्चा का केंद्र नहीं रही, बल्कि कर्मचारियों के स्वाभिमान और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए एक निर्णायक शंखनाद के रूप में उभरी है।
बैठक के दौरान रणनीति साझा करते हुए ग्राम विकास अधिकारी संघ के अध्यक्ष प्रदीप कुमार ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा कर्मचारियों की जायज मांगों की निरंतर अनदेखी की जा रही है, जिससे प्रदेश भर के कार्मिकों में भारी असंतोष व्याप्त है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में पदोन्नति की विसंगतियों को तत्काल दूर करना और 8, 16, 24 एवं 32 वर्ष की संतोषजनक सेवा पूर्ण करने पर चयनित वेतनमान (एसीपी) के लाभ को प्रभावी ढंग से लागू करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार के पे-लेवल के अनुरूप वेतनमान की स्वीकृति को लेकर भी स्वर मुखर किए गए।
आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए, बैठक के पश्चात बयाना पंचायत समिति के विकास अधिकारी को एक लिखित ज्ञापन सौंपा गया। इस ज्ञापन के माध्यम से 12 जनवरी को प्रस्तावित महारैली में सम्मिलित होने के लिए सभी ग्राम विकास अधिकारियों ने सामूहिक अवकाश की मांग की है। कर्मचारियों का तर्क है कि पुरानी पेंशन योजना की सुरक्षा, संविदा एवं मानदेय कर्मियों का नियमितीकरण और एक पारदर्शी स्थानांतरण नीति का अभाव उनके भविष्य को अंधकारमय बना रहा है। विशेष रूप से तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू करने और सरकारी विभागों के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग ने इस आंदोलन को और अधिक व्यापक बना दिया है।
प्रदीप कुमार ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि सरकार ने समय रहते सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो इस आंदोलन को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा। बैठक में उपस्थित सभी कार्मिकों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे जयपुर पहुंचकर अपनी एकजुटता का परिचय देंगे। यह आयोजन न केवल मांगों का एक पुलिंदा है, बल्कि सरकार के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि कर्मचारी अपने मान-सम्मान और संवैधानिक अधिकारों के लिए किसी भी स्तर तक संघर्ष करने को तैयार हैं।

Pratahkal Bureau
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