बयाना में गूंजा 'जय हिंद' का उद्घोष: नेताजी की 129वीं जयंती पर उमड़ा जनसैलाब, शौर्य गाथा से सराबोर हुई ऐतिहासिक नगरी
बयाना में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती पर 'पराक्रम दिवस' के अवसर पर एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। सुभाष चौक से शुरू हुई इस यात्रा में हजारों की संख्या में छात्रों, युवाओं और सामाजिक संगठनों ने भाग लिया। देशभक्ति के नारों और बैंड-बाजों के साथ निकले इस जुलूस ने पूरे शहर को राष्ट्रभक्ति के रंग में सरोबार कर दिया। जानिए कैसे बयाना की जनता ने नेताजी के बलिदान को याद कर मनाया यह ऐतिहासिक उत्सव।

बयाना। राजस्थान की ऐतिहासिक धरती बयाना में आज पराक्रम और राष्ट्रभक्ति का एक ऐसा अनूठा संगम देखने को मिला, जिसने हर नागरिक के हृदय में देशप्रेम की ज्वाला प्रज्वलित कर दी। महान स्वतंत्रता सेनानी और 'आजाद हिंद फौज' के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती के पावन अवसर पर समूचा नगर 'पराक्रम दिवस' के रंग में रंगा नजर आया। सुबह से ही फिजाओं में देशभक्ति के गीतों की गूँज और युवाओं के जोश ने यह स्पष्ट कर दिया कि नेताजी के विचार आज भी जन-जन के मानस पटल पर जीवंत हैं।
इस भव्य समारोह का आगाज शहर के हृदय स्थल 'सुभाष चौक' से हुआ, जहां गगनभेदी नारों और बैंड-बाजों की मधुर धुन के बीच एक विशाल शोभायात्रा को रवाना किया गया। जैसे ही यह शोभायात्रा पुरानी मंडी से होती हुई जवाहर चौक और गांधी चौक के तंग रास्तों से गुजरी, पूरा बाजार क्षेत्र तिरंगे के रंगों और देशभक्ति के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। इस शोभायात्रा की सबसे आकर्षक कड़ी वे स्कूली छात्र-छात्राएं थे, जो अनुशासित ढंग से मार्च करते हुए नेताजी के 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा' के संदेश को साकार कर रहे थे। सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों की भारी उपस्थिति ने इस आयोजन को एक जन-आंदोलन का स्वरूप दे दिया।
मार्ग में जगह-जगह पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया गया और नागरिकों ने श्रद्धापूर्वक नेताजी के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके बलिदान को नमन किया। कार्यक्रम के दौरान आयोजित सभा में वक्ताओं ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अदम्य साहस और भारत की स्वतंत्रता के लिए उनके द्वारा किए गए ऐतिहासिक संघर्षों पर विस्तृत प्रकाश डाला। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि नेताजी का जीवन केवल इतिहास का पन्ना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए त्याग और कर्तव्यनिष्ठा का सबसे बड़ा प्रेरणास्रोत है। आजाद हिंद फौज के गठन से लेकर वैश्विक स्तर पर भारत की आवाज बुलंद करने तक, उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
प्रशासनिक स्तर पर पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था के बीच यह भव्य आयोजन पूरी तरह अनुशासित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। इस गौरवशाली उत्सव ने न केवल बयाना की जनता को एकता के सूत्र में पिरोया, बल्कि युवाओं को देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का अहसास भी कराया। शाम ढलते-ढलते भी नगर के मुख्य चौराहों पर उत्साह का माहौल बना रहा, जो इस बात का प्रमाण है कि नेताजी का व्यक्तित्व और उनके आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं।

Pratahkal Bureau
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