बयाना। राजस्थान के बयाना उपखंड क्षेत्र से इस वक्त जनहित से जुड़ी एक बेहद गंभीर और विचलित करने वाली खबर सामने आ रही है। एक तरफ जहां सरकार और प्रशासन जल संरक्षण को लेकर बड़े-बड़े दावे करते हैं और पानी बचाने के लिए करोड़ों रुपये के जागरूकता अभियान चला रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर सरकारी महकमों की उदासीनता इन दावों की धज्जियां उड़ा रही है। बयाना उपखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम ब्रह्मबाद की धाकड़ बस्ती में जलदाय विभाग की घोर लापरवाही के चलते पिछले लंबे समय से पेयजल पाइपलाइन भीषण लीकेज का शिकार है। इस पाइपलाइन के कई प्रमुख स्थानों से पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण जब भी क्षेत्र में पेयजल की सप्लाई शुरू की जाती है, तब दबाव के साथ हजारों लीटर शुद्ध पानी व्यर्थ बहकर सीधे मुख्य सड़क मार्ग पर फैल जाता है। विभाग की इस प्रशासनिक अकर्मण्यता के कारण वर्तमान में पूरी सड़क कीचड़, गंदगी और दलदल के टापू में तब्दील हो चुकी है, जिसने स्थानीय निवासियों सहित वहां से गुजरने वाले राहगीरों का जीना मुहाल कर दिया है।

स्थानीय भुक्तभोगी ग्रामीणों ने अत्यंत आक्रोशित स्वर में बताया कि धाकड़ बस्ती में पाइपलाइन लीकेज की यह विकराल समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि यह लंबे समय से जस की तस बनी हुई है। जैसे ही जलदाय विभाग द्वारा जलापूर्ति शुरू की जाती है, पाइपलाइन के क्षतिग्रस्त हिस्सों से तेज बहाव के साथ पानी बाहर निकलने लगता है और देखते ही देखते पूरी सड़क पर सैलाब का रूप ले लेता है। लगातार पानी के जमाव और जलभराव के चलते सड़क पूरी तरह से गहरे दलदल में बदल चुकी है, जिससे आम जनता का पैदल चलना भी दूभर हो गया है। इस नारकीय स्थिति के कारण दोपहिया वाहन चालक आए दिन फिसलकर गंभीर रूप से चोटिल हो रहे हैं। सबसे भयावह स्थिति मासूम स्कूली बच्चों और लाचार बुजुर्गों की है, जिन्हें इस कीचड़ और गंदे पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे हर समय किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है।

बस्ती के प्रबुद्ध नागरिकों ने विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि इस व्यस्त सड़क मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में लोग आवागमन करते हैं, लेकिन जलदाय विभाग के जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह से मूकदर्शक बने हुए हैं। ग्रामीणों द्वारा इस गंभीर जनसमस्या के संबंध में संबंधित विभाग को कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें भेजी जा चुकी हैं, परंतु अधिकारियों की घोर उदासीनता और संवेदनहीनता के कारण अब तक क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की मरम्मत के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है। विभाग के इस अड़ियल और टालमटोल वाले रवैये को लेकर पूरी धाकड़ बस्ती सहित आसपास के क्षेत्रवासियों में शासन-प्रशासन के प्रति भारी जनाक्रोश और तीव्र नाराजगी व्याप्त है।

समस्या की भयावहता को रेखांकित करते हुए स्थानीय निवासी श्रीराम धाकड़ ने अत्यंत चिंताजनक तथ्य उजागर किए हैं। उन्होंने बताया कि सड़क पर चौबीसों घंटे लगातार पानी भरा रहने के कारण अब यह समस्या सिर्फ आवागमन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसका सीधा असर लोगों के आशियानों पर पड़ने लगा है। सड़क मार्ग के किनारे स्थित आसपास के रिहायशी घरों में भारी सीलन की समस्या पैदा हो गई है। घरों की पक्की दीवारों में भीतर तक नमी आने लगी है, जिससे मकानों के कमजोर होने और उनके ढहने का खतरा लगातार बढ़ रहा है। श्रीराम धाकड़ ने आगे सचेत करते हुए कहा कि सड़क पर जमा इस सड़ते हुए पानी और कीचड़ से पूरे इलाके में तीव्र दुर्गंध फैल रही है, जिसके चलते मच्छरों की संख्या में बेतहाशा इजाफा हो रहा है। इसके परिणामस्वरूप पूरी बस्ती में मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी जानलेवा मौसमी बीमारियों और महामारियों के फैलने का खतरा पूरी तरह मंडराने लगा है।

आसपास के ग्रामीणों का यह भी स्पष्ट रूप से कहना है कि जब मानसून की बरसात से पहले ही इस क्षेत्र के हालात इतने ज्यादा बदतर और नारकीय हो चुके हैं, तो आने वाले बारिश के दिनों में यहां की स्थिति कितनी भयावह और अनियंत्रित हो जाएगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। क्षेत्र में पानी की निकासी के लिए कोई उचित और सुव्यवस्थित नाली व्यवस्था नहीं होने के कारण आगामी वर्षाकाल में पूरी की पूरी बस्ती में भयंकर गंदगी, कचरा और संक्रमण फैलने की पूर्ण आशंका बनी हुई है। बार-बार की उपेक्षा से तंग आ चुके आक्रोशित ग्रामीणों ने अब जलदाय विभाग को दो टूक शब्दों में अंतिम चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रशासन ने इस गंभीर समस्या का त्वरित स्थायी समाधान नहीं किया, तो समस्त ग्रामीण एकजुट होकर जलदाय विभाग के खिलाफ उग्र प्रदर्शन, चक्का जाम और घेराव करने को मजबूर होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन की होगी।

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर स्थानीय सजग नागरिकों ने उपखंड प्रशासन और जलदाय विभाग के उच्चाधिकारियों से बेहद पुरजोर मांग की है कि धाकड़ बस्ती की इस पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी मुख्य पेयजल पाइपलाइन को अविलंब युद्धस्तर पर दुरुस्त कराया जाए, ताकि प्रतिदिन होने वाली अमूल्य पानी की बर्बादी को पूरी तरह रोका जा सके और पीड़ित जनता को इस नारकीय जीवन से तत्काल राहत मिल सके। इसके साथ ही ग्रामीणों ने मांग की है कि सड़क पर महीनों से जमा इस बदबूदार कीचड़ और गंदे पानी की संपूर्ण सफाई सुनिश्चित करवाकर आमजन के आवागमन को पुनः सुचारु और सुरक्षित बनाया जाए। क्षेत्रवासियों का स्पष्ट मत है कि एक तरफ सूबे की सरकार जल ही जीवन है का नारा देकर जल संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता दिखा रही है, वहीं बयाना के जलदाय विभाग की यह खुली लापरवाही सरकारी मंशा को ठेंगा दिखा रही है। ऐसे में उच्च स्तर पर बैठे जिम्मेदार नीति-नियंताओं को इस जमीनी समस्या का संज्ञान लेकर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। (रिपोर्ट - देवीसिंह प्रजापत बयाना 7877668534, 8005971868)

Pratahkal Newsroom

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