बयाना। राजस्थान के बयाना में ऐतिहासिक बागड़ फील्ड मैदान इन दिनों प्रशासनिक उपेक्षा और घोर उदासीनता की जिंदा मिसाल बन चुका है। जहां एक ओर देश अपने 77वें गणतंत्र दिवस के जश्न की तैयारियों में डूबा है, वहीं बयाना का यह प्रमुख मैदान अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। आगामी 26 जनवरी को आयोजित होने वाले उपखंड स्तरीय मुख्य समारोह के लिए राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के मासूम छात्र-छात्राएं इसी उबड़-खाबड़ मैदान में रिहर्सल करने को मजबूर हैं, लेकिन मैदान की रूह कंपा देने वाली स्थिति बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ राष्ट्रीय पर्व की गरिमा को भी खुली चुनौती दे रही है।

मैदान की वास्तविकता किसी डरावने मंजर से कम नहीं है। चारों ओर गहरे गड्ढे और ऊबड़-खाबड़ जमीन ने इसे खेल मैदान के बजाय एक असुरक्षित खंडहर में तब्दील कर दिया है। विडंबना यह है कि यह भूमि राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बयाना के स्वामित्व में है, इसके बावजूद यहां पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधा तक मयस्सर नहीं है। प्यास से बेहाल और थकान से चूर बच्चे जब अभ्यास करते हैं, तो धूल के गुबार और गड्ढों में पैर फिसलने का डर हमेशा बना रहता है। स्थानीय प्रशासन की आंखों के सामने स्कूल की संपत्ति पर अव्यवस्था का यह साम्राज्य फैला है, लेकिन अब तक समाधान की एक किरण भी नजर नहीं आई है।

इस बदहाली में आग में घी डालने का काम वन विभाग की कार्यप्रणाली ने किया है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, वन विभाग ने अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए भारी-भरकम पत्थरों से लदे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को इसी खेल मैदान में लाकर खड़ा कर दिया है। सरकारी जमीन पर सरकारी विभाग द्वारा ही किया गया यह 'अतिक्रमण' न केवल बच्चों के अभ्यास में बाधा बन रहा है, बल्कि गणतंत्र दिवस जैसे गरिमामयी आयोजन की तैयारियों में भी रोड़ा अटका रहा है। पत्थरों के इन ढेरों के बीच अभ्यास करना किसी जोखिम भरे स्टंट से कम नहीं है, जिससे अभिभावकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

इस गंभीर मुद्दे पर वरिष्ठ शारीरिक शिक्षक लक्ष्मी देवी, प्रहलाद शर्मा, राजेन्द्र मीणा, वीरेश गुर्जर और लखन खटाना ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उनके साथ कृष्ण कुमार यादव, अन्जू कुमारी, रामेश्वर धाकड़ और यादराम शर्मा जैसे खेल विशेषज्ञों ने भी प्रशासन को आगाह किया है कि यदि समय रहते मैदान को समतल नहीं किया गया और यहां से अवरोध नहीं हटाए गए, तो किसी भी अनहोनी की जिम्मेदारी शासन की होगी। शारीरिक शिक्षक लखन लाल और निजी स्कूल शिक्षक यादराम शर्मा ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रशासन की यह लापरवाही बच्चों के भविष्य और उनके उत्साह के साथ खिलवाड़ है। अब जनता की निगाहें उपखंड प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या वे 26 जनवरी से पहले इस मैदान का कायाकल्प कर पाएंगे या फिर तिरंगे की आन-बान-शान के बीच यह बदहाली बयाना की साख पर बट्टा लगाती रहेगी।

Devisingh Prajapat, Bharatpur

Devisingh Prajapat, Bharatpur

नाम: देवीसिंह प्रजापत

कार्यक्षेत्र: बयाना उपखंड / उप जिला बयाना (राजस्थान)

अनुभव: 15 वर्ष

बीट (मुख्य विषय): सर्वपक्षीय समाचार (सभी तरह की खबरें और ग्राउंड रिपोर्टिंग)

परिचय 

देवीसिंह प्रजापत राजस्थान के बयाना उपखंड क्षेत्र के एक अत्यंत अनुभवी, निष्पक्ष और सक्रिय पत्रकार हैं। वह मुख्य रूप से उप जिला बयाना और संपूर्ण बयाना उपखंड की हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर पैनी नजर रखते हैं। स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं, विकास कार्यों से लेकर क्षेत्र की हर प्रमुख हलचल और सभी तरह की खबरों को प्रमुखता व प्रामाणिकता के साथ पाठकों तक पहुंचाना उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषता है।

पत्रकारिता का व्यापक अनुभव (Work Experience)

देवीसिंह प्रजापत जी को मीडिया जगत का एक लंबा और समृद्ध अनुभव है। वह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। इस डेढ़ दशक के सफर में उन्होंने मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स (प्रिंट, डिजिटल व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) पर काम किया है, जिससे उन्हें ग्राउंड रिपोर्टिंग और क्षेत्रीय मुद्दों की गहरी समझ है।

शैक्षणिक योग्यता

देवीसिंह प्रजापत जी शैक्षणिक रूप से बेहद सुदृढ़ हैं। उन्होंने विज्ञान स्नातक (B.Sc.) के साथ-साथ बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग (B.E.) की डिग्री हासिल की है। उनकी यह तकनीकी और तार्किक पृष्ठभूमि उन्हें खबरों के विश्लेषण, तथ्यों की जांच और समसामयिक मुद्दों को एक वैज्ञानिक व सटीक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने में सक्षम बनाती है।

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