बयाना में गणगौर पूजा की तैयारी पूरी, बाजारों में 150 रुपये किलो पहुंचा गुना का भाव
राजस्थान के बयाना में 21 मार्च को मनाया जाएगा गणगौर पर्व, सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए करेंगी ईसर-गौरा की विशेष पूजा अर्चना।

बयाना के बाजारों में गणगौर पर्व के लिए तैयार पारंपरिक 'गुना' मिठाई; सांकेतिक तस्वीर। Image generated by AI for illustrative purposes.
बयाना कस्बे में इस समय गणगौर पूजा की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी है, हलवाईयों द्वारा गुना तैयार किए जा चुके हैं। जिन्हें गणगौर पूजन करने वाले खरीदने में लगे हुए हैं। बयाना सहित उपखण्ड क्षेत्र के विभिन्न गांवों में यूं तो कई पर्व त्यौहार हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार समय-समय पर मनाएं जाते हैं क्योंकि यहाँ कई धर्म के लोग रहते हैं। इन्हीं परम्पराओं में शुमार सोलह दिनों तक अनवरत चलने वाला एवं खेलने वाला ऐतिहासिक पारम्परिक त्यौहार गणगौर पूजन में विभिन्न समाजों की महिलाएं अपने पति अथवा होने वाले पति को लेकर भगवान शिवजी (ईसर) और माता पार्वती (गौरा) की पूजा अर्चना कर मनोकामनाएं मांगी जाती है। इस वर्ष गणगौर पूजा शनिवार 21 मार्च 2026 को की जाएगी, जहाँ कन्याएं शिव-गोरा के रूप रखकर बाजार में निकलेगी और घर-घर में उनका पूजन कर आशीर्वाद लिया जाएगा।
हलवाईयों द्वारा तैयार 'गुना' और बाजार का हाल
गणगौर एक और वजह से जाना जाता है जहां इस पर्व में ख़ास मिठाई 'गुना' बनाई जाती है, जो कि साल भर में एक बार ही मिलता है। कस्बे के हिंडौन सड़क मार्ग स्थित रामद्वारा के पास अग्रवाल मिष्ठान भंडार, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के पास सैनी मिष्ठान भंडार सहित अन्य मुख्य बाजार, पुरानी सब्जी मण्डी ऊपरला बाजार, पुरानी अनाज मण्डी सहित विभिन्न बाजारों में हलवाई गणगौर पूजन में माता पार्वती जी और शिव जी को भोग लगाने के लिए एवं सुहाग के प्रतीक पारम्परिक ऐतिहासिक मिठाई गुना बनाने में जुट गए हैं। हलवाई राकेश अग्रवाल ने बताया कि "मीठे गुना गणगौर पूजन एवं मंसने के काम आते हैं, जिनका भाव 140 रु से लेकर 150 रु तक का चल रहा है।" इन मिठाइयों के निर्माण से स्थानीय युवाओं को रोजगार भी उपलब्ध हो रहा है।
पर्व का महत्व और वैवाहिक परंपरा
गणगौर पर्व की शुरुआत होली के अगले दिन से शुरू हो जाती है और सोलह दिनों तक अनवरत चलती है, लेकिन चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर गणगौर पर्व का खास महत्व होता है। गणगौर शब्द का अर्थ शिव और गौरी से मिला हुआ है, इसलिए यह पर्व पति-पत्नी के प्रेम, वैवाहिक जीवन और समर्पण को दर्शाता है। जहाँ महिला श्रद्धालु भगवान शिव और माता पार्वती जी की पूजा अर्चना करते हुए भगवान से परिवार में सुख-शांति समृद्धि एवं क्षेत्र में खुशहाली की मनोकामनाएं मांगती हैं। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु की कामना और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए व्रत रखकर पूजा अर्चना करती हैं।

Pratahkal Bureau
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