बयाना: सेवा और संकल्प के साथ मनाया किसान नेता सुरेंद्र सिंह कंसाना का जन्मदिन, सादगी और संस्कारों की पेश की मिसाल
बयाना में किसान यूनियन (अंबाबता) के राष्ट्रीय महासचिव सुरेंद्र सिंह कंसाना ने सेवा और सादगी के साथ मनाया अपना जन्मदिन। श्री कैला देवी झील का बाड़ा मंदिर में पूजा-अर्चना, गौ-सेवा और बंदरों को भोज कराकर दिया मानवता का संदेश। किसानों से एकजुट रहने और भारतीय संस्कृति को बचाने का किया आह्वान। जानें इस खास आयोजन की पूरी रिपोर्ट।

बयाना/भरतपुर। भारतीय कृषि व्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले अन्नदाता के हितों की आवाज़ बुलंद करने वाले प्रमुख चेहरा और किसान यूनियन (अंबाबता) के राष्ट्रीय महासचिव सुरेंद्र सिंह कंसाना ने अपना जन्मदिवस केवल व्यक्तिगत उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार और संगठन की मजबूती के संकल्प के साथ मनाया। शुक्रवार को बयाना क्षेत्र में आयोजित इस कार्यक्रम में किसान नेता ने पाश्चात्य संस्कृति के चकाचौंध से दूर रहकर अपनी जड़ों और सामाजिक सरोकारों से जुड़ने का एक प्रेरक संदेश दिया।
दिन की शुरुआत आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ हुई, जब सुरेंद्र सिंह कंसाना भरतपुर जिले के सुप्रसिद्ध धार्मिक आस्था के केंद्र श्री कैला देवी झील का बाड़ा मंदिर पहुंचे। वहां उन्होंने माता के दरबार में माथा टेक कर विधिवत पूजा-अर्चना की और राष्ट्र की उन्नति, समाज में समरसता तथा किसानों की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। इस दौरान उनके साथ बड़ी संख्या में मौजूद समर्थकों ने भी लोक कल्याण की कामना की। भक्ति और शक्ति के इस संगम के बाद कंसाना ने जीव-जंतुओं के प्रति अपनी करुणा प्रकट करते हुए झीलकाबाड़ा के वनों में विचरण करने वाले वानरों को केले और चने खिलाए। साथ ही, उन्होंने गौशाला पहुंचकर गायों को हरा चारा खिलाकर गौ-सेवा का पुण्य अर्जित किया।
कार्यकर्ताओं और किसानों को संबोधित करते हुए सुरेंद्र सिंह कंसाना ने बड़े ही ओजस्वी शब्दों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्व समझाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की आत्मा और देश की आर्थिक प्रगति का मुख्य मार्ग गांवों और खेत-खलिहानों से होकर गुजरता है। पश्चिमी सभ्यता और 'फाइव स्टार' संस्कृति पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी जीवनशैली भारतीय मूल्यों और ग्रामीण परिवेश के लिए घातक है। उन्होंने किसानों और मजदूरों से आह्वान किया कि वे अपने अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए संगठित रहें, क्योंकि एकता ही संघर्ष का सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने कड़कड़ाती ठंड, भीषण गर्मी और मूसलाधार बारिश में भी देश का पेट भरने वाले किसान को राष्ट्र का सच्चा भाग्यविधाता बताया।
सम्मान समारोह के दौरान उपस्थित किसानों और कार्यकर्ताओं ने अपने प्रिय नेता का साफा बांधकर और माला पहनाकर भव्य स्वागत किया। इस मौके पर उनके दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना की गई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से शंकर सिंह फौजदार, चतुर्भुज तलछेरा, धनेश कसाना, वेदु कसाना, यशपाल कसाना, कृष्ण कसाना, अरविंद पटेल और भूरी फौजदार सहित क्षेत्र के अनगिनत किसान एवं कर्मठ कार्यकर्ता उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल एक जन्मदिन का उत्सव था, बल्कि किसानों की एकजुटता और भारतीय संस्कृति के प्रति अटूट निष्ठा का जीवंत प्रमाण बनकर उभरा।

Devisingh Prajapat, Bharatpur
नाम: देवीसिंह प्रजापत
कार्यक्षेत्र: बयाना उपखंड / उप जिला बयाना (राजस्थान)
अनुभव: 15 वर्ष
बीट (मुख्य विषय): सर्वपक्षीय समाचार (सभी तरह की खबरें और ग्राउंड रिपोर्टिंग)
परिचय
देवीसिंह प्रजापत राजस्थान के बयाना उपखंड क्षेत्र के एक अत्यंत अनुभवी, निष्पक्ष और सक्रिय पत्रकार हैं। वह मुख्य रूप से उप जिला बयाना और संपूर्ण बयाना उपखंड की हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर पैनी नजर रखते हैं। स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं, विकास कार्यों से लेकर क्षेत्र की हर प्रमुख हलचल और सभी तरह की खबरों को प्रमुखता व प्रामाणिकता के साथ पाठकों तक पहुंचाना उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषता है।
पत्रकारिता का व्यापक अनुभव (Work Experience)
देवीसिंह प्रजापत जी को मीडिया जगत का एक लंबा और समृद्ध अनुभव है। वह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। इस डेढ़ दशक के सफर में उन्होंने मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स (प्रिंट, डिजिटल व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) पर काम किया है, जिससे उन्हें ग्राउंड रिपोर्टिंग और क्षेत्रीय मुद्दों की गहरी समझ है।
शैक्षणिक योग्यता
देवीसिंह प्रजापत जी शैक्षणिक रूप से बेहद सुदृढ़ हैं। उन्होंने विज्ञान स्नातक (B.Sc.) के साथ-साथ बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग (B.E.) की डिग्री हासिल की है। उनकी यह तकनीकी और तार्किक पृष्ठभूमि उन्हें खबरों के विश्लेषण, तथ्यों की जांच और समसामयिक मुद्दों को एक वैज्ञानिक व सटीक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने में सक्षम बनाती है।
