बयाना। राजस्थान के बयाना कस्बे में बेटियों के भविष्य को संवारने का दावा करने वाला एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान आज अपनी गरिमा को लेकर गंभीर विवादों के घेरे में है। अग्रवाल समाज कल्याण एवं शिक्षा समिति द्वारा संचालित श्री अग्रसेन कन्या महाविद्यालय, जो दिन के उजाले में छात्राओं को संस्कार और शिक्षा देने के लिए जाना जाता है, वहां की एक 'वायरल हकीकत' ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। गुरुवार शाम सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुए एक वीडियो ने कॉलेज प्रबंधन की कार्यप्रणाली और संस्थान के भीतर होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की पोल खोलकर रख दी है।

घटनाक्रम के अनुसार, वायरल वीडियो में कॉलेज स्टाफ का एक कर्मचारी हाथ में अंडा करी (एग करी) से भरी बाल्टी लेकर कॉलेज परिसर की ऊपरी मंजिल से नीचे उतरता हुआ स्पष्ट दिखाई दे रहा है। इस दृश्य ने उस समय नाटकीय मोड़ ले लिया जब अग्रसेन जयंती कमेटी के पूर्व अध्यक्ष जितेन्द्र अग्रवाल मौके पर पहुंच गए। उन्होंने न केवल इस पूरे प्रकरण को अपने मोबाइल कैमरे में कैद किया, बल्कि संबंधित कर्मचारी से इस बारे में पूछताछ भी की। वीडियो में जब कर्मचारी से सवाल किया गया, तो उसने बिना किसी हिचकिचाहट के यह स्वीकार किया कि यह अंडा करी कॉलेज प्रबंधन समिति के मंत्री मणि अग्रवाल के निर्देश पर तैयार करवाई गई है।

कर्मचारी के इस बयान ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है, क्योंकि एक सात्विक और शैक्षिक वातावरण वाले संस्थान में इस तरह की गतिविधियों का होना स्थानीय समाज के गले नहीं उतर रहा है। वीडियो सामने आने के बाद कस्बे के निवासियों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय लोगों का तर्क है कि जिस स्थान पर दिन में छात्राएं ज्ञानार्जन करती हैं, वहां शाम ढलते ही इस प्रकार का भोजन बनना संस्थान के नैतिक मूल्यों का पतन दर्शाता है। सोशल मीडिया पर भी कॉलेज प्रबंधन की जमकर किरकिरी हो रही है और लोग इसे बेटियों की शिक्षा के नाम पर संचालित संस्थान की मर्यादा का उल्लंघन मान रहे हैं।

फिलहाल, इस पूरे प्रकरण ने श्री अग्रसेन कन्या महाविद्यालय के प्रबंधन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। कस्बे में इस बात को लेकर तीखी बहस छिड़ी हुई है कि क्या शिक्षण संस्थानों के भीतर इस तरह की निजी और अमर्यादित गतिविधियां प्रबंधन की मिलीभगत के बिना संभव हैं? जागरूक नागरिक और समाज के लोग अब इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं ताकि इस घटना के पीछे के वास्तविक जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की जा सके। यह विवाद न केवल कॉलेज की साख के लिए चुनौती बन गया है, बल्कि शिक्षा जगत के लिए भी एक चिंताजनक संदेश दे रहा है।

Pratahkal Bureau

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