बयाना। राजस्थान के भरतपुर जिले के बयाना उपखंड में आस्था और मर्यादाओं को ताक पर रखकर सार्वजनिक संपत्तियों को निशाना बनाने का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। ग्राम पंचायत पुरावाईखेडा (पुरा) में पूर्वजों के समय से श्मशान के रूप में उपयोग की जा रही भूमि पर कुछ रसूखदार लोगों द्वारा अवैध कब्जा किए जाने के बाद गांव में तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। यह विवाद केवल जमीन के एक टुकड़े का नहीं, बल्कि ग्रामीणों की गहरी संवेदनाओं और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा है, जिस पर अब अतिक्रमण की काली छाया मंडराने लगी है।

राजस्व रिकॉर्ड के पन्नों को पलटें तो ग्राम पंचायत पुरावाईखेडा की आराजी खसरा संख्या 408/2413/2, 414/2 एवं 416/2 आधिकारिक तौर पर गैरमुमकिन सड़क के रूप में दर्ज हैं। लेकिन धरातल पर वास्तविकता यह है कि यह स्थल सदियों से गांव के मरघट यानी श्मशान के रूप में उपयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की आबादी के समीप स्थित इस पवित्र स्थल की गरिमा को भंग करते हुए कुछ दबंग व्यक्तियों ने जेसीबी मशीन का सहारा लेकर सार्वजनिक और सरकारी भूमि को अपनी निजी जागीर बनाने का प्रयास शुरू कर दिया है।

इस पूरे घटनाक्रम में अतिक्रमणकारियों ने न केवल खसरा संख्या 408, 407 और 435 (जो गैरमुमकिन नदी के रूप में दर्ज है) को निशाना बनाया, बल्कि सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के अधीन आने वाली खसरा संख्या 413/2, 414/2 और 416/2 (गैरमुमकिन सड़क) पर भी अवैध रूप से कब्जा जमा लिया है। जेसीबी की दहाड़ के साथ इस भूमि का स्वरूप बदलने की कोशिशों ने गांव के शांत वातावरण को अशांत कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर वे अपने अपनों को अंतिम विदाई देते आए हैं, वहां अब दबंगई का बोलबाला हो रहा है।

रिपोर्टर देवीसिंह प्रजापत की पड़ताल के अनुसार, इस अतिक्रमण के चलते श्मशान की भूमि का मार्ग और दायरा सिमटता जा रहा है, जिससे भविष्य में अंतिम संस्कार जैसी अनिवार्य क्रियाओं में भारी कठिनाई आने की आशंका है। ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर स्थानीय प्रशासन और राजस्व विभाग के अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने मांग की है कि प्रशासन अविलंब हस्तक्षेप कर इस अवैध कब्जे को हटाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करे। अब देखना यह होगा कि प्रशासन भू-माफियाओं के खिलाफ क्या रुख अपनाता है और ग्रामीणों की इस पुकार पर कब तक कार्रवाई होती है।

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