बयाना उपखंड के बाजना चौक में शनिवार को आयोजित सर्व समाज की विशाल महापंचायत ने वनखंड क्षेत्र के गांवों को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। भरतपुर, धौलपुर और करौली जिलों से बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने एक स्वर में मांग उठाई कि वनखंड क्षेत्र के गांवों को वन विभाग के दायरे से मुक्त किया जाए, ताकि क्षेत्र में विकास कार्यों को गति मिल सके।

महापंचायत में वक्ताओं ने कहा कि वर्षों से वनखंड क्षेत्र के ग्रामीण वन विभाग से जुड़ी विभिन्न पाबंदियों के कारण मूलभूत विकास योजनाओं से वंचित रह रहे हैं। सड़क, बिजली और पेयजल जैसी आवश्यक सुविधाओं के विस्तार एवं निर्माण कार्यों में लगातार प्रशासनिक बाधाएं सामने आती हैं, जिससे क्षेत्र का समुचित विकास प्रभावित हो रहा है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वन विभाग के नियमों के कारण आम जनता को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि यदि वनखंड का दर्जा समाप्त किया जाता है तो क्षेत्र में विकास के नए अवसर खुलेंगे और चंदन तस्करी सहित अन्य अवैध गतिविधियों के नाम पर उत्पन्न होने वाली परेशानियों से भी लोगों को राहत मिलेगी।

महापंचायत में यह भी मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया कि वन्य जीवों के बढ़ते प्रभाव के कारण किसानों की फसलों और जनजीवन को लगातार नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों ने इस स्थिति से राहत दिलाने के लिए सरकार से ठोस और प्रभावी कदम उठाने की मांग की।

कार्यक्रम के दौरान सर्व समाज के प्रतिनिधियों ने सरकार तक अपनी मांग पहुंचाते हुए चेतावनी दी कि यदि वनखंड क्षेत्र के गांवों को वन विभाग के दायरे से मुक्त करने पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। इस महापंचायत ने क्षेत्रीय विकास और प्रशासनिक नीतियों को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

Pratahkal Bureau

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