बयाना: सांसद संजना जाटव के खिलाफ फूटा आक्रोश, हरियाणा में सांसद निधि खर्च करने के आरोप में फूंका पुतला
बयाना में सांसद संजना जाटव का पुतला फूंककर जनता ने जताया विरोध। भरतपुर सांसद पर सांसद निधि (MPLADS) का पैसा हरियाणा के कैथल में खर्च करने की सिफारिश का आरोप। व्यापारियों और आमजन ने इसे भरतपुर की जनता के साथ विश्वासघात बताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। जानें क्या है पूरा विवाद और क्यों निशाने पर हैं कांग्रेस सांसद।

बयाना (भरतपुर)। भरतपुर लोकसभा क्षेत्र में उस समय सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया, जब स्थानीय सांसद संजना जाटव के खिलाफ उनके ही निर्वाचन क्षेत्र में विरोध की ज्वाला भड़क उठी। बुधवार को बयाना कस्बे के ऐतिहासिक जवाहर चौक पर व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों ने सांसद के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनका पुतला दहन किया। यह विरोध प्रदर्शन किसी व्यक्तिगत रंजिश के कारण नहीं, बल्कि सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (MPLADS) की राशि को राजस्थान की सीमा लांघकर पड़ोसी राज्य हरियाणा में विकास कार्यों के लिए आवंटित करने की सिफारिश के विरोध में किया गया है।
रिपोर्टर देवीसिंह प्रजापत के अनुसार, प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट आरोप है कि सांसद संजना जाटव ने भरतपुर की जनता के विकास के लिए निर्धारित बजट को हरियाणा के कैथल विधानसभा क्षेत्र में खर्च करने की अनुशंसा की है। विशेष रूप से यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि कैथल वही क्षेत्र है, जहाँ से कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सुरजेवाला के पुत्र चुनावी राजनीति में सक्रिय हैं। बयाना के व्यापारियों और आमजन ने इस कदम को भरतपुर की जनता के साथ सीधा विश्वासघात करार दिया। प्रदर्शन के दौरान स्थानीय लोगों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि जिस जनता ने भारी बहुमत और उम्मीदों के साथ संजना जाटव को चुनकर संसद भेजा, उसी जनता की जरूरतों को दरकिनार कर दूसरे राज्य के विकास को प्राथमिकता देना कतई स्वीकार्य नहीं है।
इस विवाद की गूँज केवल भरतपुर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसने प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। गौरतलब है कि भरतपुर सांसद संजना जाटव के साथ-साथ झुंझुनूं सांसद बृजेंद्र ओला और चूरू सांसद राहुल कसवां का नाम भी इस प्रकरण में जुड़ रहा है। इन तीनों सांसदों द्वारा हरियाणा के कैथल क्षेत्र में विकास कार्यों हेतु अनुशंसा किए जाने से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है। बयाना में हुए इस प्रदर्शन ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि यदि इस निर्णय पर जल्द ही स्पष्टीकरण नहीं दिया गया और भरतपुर के विकास कोष का रुख पुनः स्थानीय कार्यों की ओर नहीं मोड़ा गया, तो यह विरोध प्रदर्शन आने वाले दिनों में और अधिक उग्र रूप धारण कर सकता है।

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