बयाना। 21 दिसंबर, रविवार को आर्यसमाज बयाना में महान राष्ट्रभक्त और अमर हुतात्मा स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती का 100वां बलिदान दिवस श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ पवित्र अग्निहोत्र से सुनयना आर्या के ब्रह्मत्व में किया गया, जो आयोजन को आध्यात्मिक और भक्तिमय वातावरण प्रदान कर रहा था। यज्ञ के पश्चात राधा आर्या ने एक मधुर गीत प्रस्तुत कर समारोह की गरिमा और उत्साह को बढ़ाया।

इस अवसर पर स्वामी श्रद्धानंद जी के जीवन और कार्यों पर आधारित फिल्म “आह्वान” का भी प्रदर्शन किया गया, जिसे बच्चों और वयस्कों ने समान उत्साह के साथ देखा। आर्यसमाज के प्रधान आचार्य रविशंकर आर्य ने समारोह के दौरान स्वामी श्रद्धानंद के असाधारण व्यक्तित्व और उनके योगदान के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि स्वामी जी ऋषि दयानंद के अनन्य शिष्य थे, दलितों के मसीहा, स्वतंत्रता सेनानी और महान राष्ट्रभक्त थे।

स्वामी श्रद्धानंद ने हरिद्वार में सुप्रसिद्ध गुरुकुल कांगड़ी की स्थापना की और रॉलेट एक्ट के विरोध में चांदनी चौक पर अंग्रेजों के सामने अपनी निडरता का परिचय देते हुए संघर्ष किया। उन्होंने अपने देश और धर्म की रक्षा के लिए जेल का भी सामना किया और अंततः 23 दिसंबर 1926 को अपने बलिदान से राष्ट्रहित में अमरत्व प्राप्त किया।

फिल्म प्रदर्शन के पश्चात बच्चों से स्वामी जी के जीवन और योगदान से जुड़े प्रश्न पूछे गए, जिनके उत्तर देने वाले बच्चों को आर्यसमाज द्वारा पुरस्कृत किया गया। समारोह में गोविन्द आर्य, परमसुख आर्य, अनिल लोहिया, बिरजू आर्य, भगवान सहाय, राजेश गुप्ता, लक्ष्मी बंसल, पिंकी गुप्ता, शिक्षावती आर्या, सुधा लोहिया, गीता आर्या, ऊषा गुप्ता, कान्ता मित्तल, निहाल आर्य, पारस आर्य और केशव आर्य सहित अनेक आर्यजन उपस्थित रहे।

यह कार्यक्रम न केवल स्वामी श्रद्धानंद जी के अद्वितीय योगदान और बलिदान को याद करने का अवसर था, बल्कि युवाओं और समाज के सभी वर्गों को उनके आदर्शों से प्रेरित होने का संदेश भी प्रदान करता है।

Pratahkal Bureau

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