झालावाड़ में सरकारी स्कूल की बिल्डिंग गिरने से मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत के बाद पूरे राजस्थान में शिक्षा विभाग हरकत में आया था। प्रदेशभर के जर्जर स्कूल भवनों का सर्वे कर उन्हें सुरक्षा कारणों से ध्वस्त कर दिया गया। लेकिन हादसे के चार से पांच महीने बीत जाने के बाद भी नई बिल्डिंगों का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। नतीजतन, बच्चों और शिक्षकों को अस्थायी जगहों पर पढ़ाई करनी पड़ रही है, जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

भरतपुर जिले के श्योराना स्थित महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय इसका ताजा उदाहरण है। विद्यालय परिसर में पांच महीने पहले दो जर्जर कक्षों को तोड़ा गया था। लेकिन उसके बाद से न तो निर्माण कार्य शुरू हुआ और न ही नए कमरों की स्वीकृति मिली। स्कूल में कक्षाओं की कमी के कारण दो क्लासों की पढ़ाई विद्यालय परिसर के बाहर अन्य स्थानों पर कराई जा रही है।

स्थानीय निवासी लोकेंद्र फौजदार ने बताया कि झालावाड़ हादसे के बाद शिक्षा विभाग के निर्देश पर क्षतिग्रस्त कमरे तोड़ दिए गए थे, परंतु फंड की कमी के चलते नए कमरों का निर्माण शुरू नहीं हो सका। ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों को कई बार अवगत कराया, मगर जवाब यही मिला कि बजट मिलने के बाद ही काम शुरू होगा।

ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि गर्मी और सर्दी के मौसम में अस्थायी स्थानों पर बच्चों की पढ़ाई बेहद कठिन हो जाती है। स्कूल प्रशासन भी सीमित संसाधनों में कक्षाओं का संचालन करने को मजबूर है।

इस बीच, राजस्थान उच्च न्यायालय ने भी सरकारी स्कूलों की स्थिति पर गंभीर टिप्पणी की है। अदालत ने स्कूलों के सुधार को लेकर राज्य सरकार के प्रस्तुत रोडमैप को अधूरा बताते हुए लौटा दिया। न्यायालय ने कहा कि सरकार “विजन 2047” की बातें तो करती है, लेकिन स्कूलों के लिए “कल की योजना” भी स्पष्ट नहीं है। अदालत ने झालावाड़ हादसे के बाद दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से भवनों की स्थिति और सुरक्षा मानकों पर गाइडलाइन के अनुसार विस्तृत जानकारी मांगी है।

श्योराना सहित कई ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में यही स्थिति बनी हुई है — जहां पुराने भवन तो गिरा दिए गए, मगर नए निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है और ग्रामीणों में सरकार के प्रति असंतोष बढ़ता जा रहा है। अब लोगों की उम्मीदें न्यायालय और सरकार दोनों से हैं कि बच्चों को सुरक्षित और स्थायी स्कूल भवन जल्द उपलब्ध कराए जाएं।

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Pratahkal Bureau

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