भुसावर।

भुसावर उपखंड में प्रशासनिक अधिकारियों और खनिज विभाग की अनदेखी के चलते अवैध खनन का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। नियमों को ताक पर रखकर दर्जनों क्रेशर बिना भूमि कन्वर्जन के संचालन कर रहे हैं, जिससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व की हानि हो रही है। वर्षों से चल रहे इन अवैध क्रेशरों पर प्रशासनिक चुप्पी ने भ्रष्टाचार और मिलीभगत की बू को और गहरा कर दिया है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, भुसावर के नया गांव खालसा, बल्लभगढ़, घाटरी और कारवान क्षेत्रों की पर्वतमालाओं में दिन-रात पत्थरों का अवैध खनन जारी है। खनन माफिया बड़े पैमाने पर एलएनटी और भारी मशीनों की मदद से पहाड़ों को काटकर पत्थर निकाल रहे हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन और खनिज विभाग की मिलीभगत से यह धंधा वर्षों से चल रहा है, जबकि जिन क्षेत्रों में खनन हो रहा है वहां किसी भी प्रकार की सरकारी लीज तक नहीं है।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि रात के अंधेरे में एलएनटी से विस्फोट कर पत्थरों को निकाला जाता है और फिर उन्हें बिना रोक-टोक क्रेशरों तक पहुंचाया जाता है। इससे न केवल पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है बल्कि आसपास के किसानों की फसलों पर भी बुरा असर पड़ रहा है। उड़ती हुई डस्ट ने उपजाऊ भूमि को बंजर बना दिया है, वहीं प्रशासनिक स्तर पर धूल नियंत्रण हेतु पानी का छिड़काव तक नहीं किया जा रहा।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि घाटरी क्रेशर जोन की कुछ इकाइयां अवैध खनन माफियाओं से पत्थर खरीदकर अपने क्रेशर चला रही हैं और बदले में उन्हें विस्फोटक सामग्री भी उपलब्ध करा रही हैं। इन क्रेशरों ने वर्षों से भूमि का कन्वर्जन नहीं कराया, जबकि कुछ ने सिर्फ आधे-अधूरे भूभाग का कन्वर्जन दिखाकर नियमों की आड़ ले ली है। प्रशासन ने अब तक किसी भी क्रेशर संचालक को नोटिस जारी नहीं किया, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किसकी शह पर यह सब चल रहा है।

मायदपुर और बल्लभगढ़ गांव की पहाड़ियों में हो रहे इस अवैध खनन से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है। लगातार हो रहे विस्फोटों से ग्रामीण क्षेत्रों में हादसे की आशंका बनी हुई है। किसानों का कहना है कि विस्फोटों से खेतों की फसलें नष्ट हो रही हैं और घरों में दरारें तक पड़ रही हैं।

जब इस संबंध में बयाना रेंजर जतिन सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि क्षेत्र में लगातार गश्त की जाएगी और अवैध खनन वाले प्वाइंट्स पर वन विभाग के कर्मचारी तैनात किए जाएंगे। वहीं भुसावर तहसीलदार अभयराज सिंह ने बताया कि “बिना कन्वर्जन के चल रही क्रेशरों का मामला मेरे संज्ञान में आया है, जल्द ही जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”

फिलहाल, भुसावर क्षेत्र में फैले इस अवैध खनन नेटवर्क ने न केवल पर्यावरण और कृषि को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि सरकारी खजाने को भी करोड़ों का चूना लगाया है। स्थानीय लोगों की उम्मीद अब प्रशासन की उस सख्त कार्रवाई पर टिकी है जो वर्षों से लटकी हुई है।

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story