भुसावर उपखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में प्रशासन और खनिज विभाग की लगातार उदासीनता के कारण अवैध खनन की घटनाएँ लगातार बढ़ती जा रही हैं। स्थानीय क्रेशर संचालक और प्रशासनिक अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका के चलते पर्वत मालाओं में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जिससे राज्य सरकार को प्रतिदिन करोड़ों रुपए का राजस्व हानि हो रही है।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, भुसावर के आसपास करीब 23 क्रेशर बिना कानूनी कन्वर्जन और आवश्यक अनुमति के लंबे समय से संचालित हो रहे हैं। इन क्रेशरों के संचालन के लिए न तो प्रशासनिक अधिकारियों ने कोई नोटिस जारी किया है और न ही खनन नियमों के पालन की जांच की गई है।

मयादपुर गांव की पहाड़ियों में चल रहे अवैध खनन के दौरान विस्फोटों से आसपास के घरों में दरारें पड़ रही हैं और किसानों की फसल भी नुकसान का सामना कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन में मुख्य भूमिका क्रेशर संचालकों की है, जो खनन माफियाओं को विस्फोटक उपलब्ध कराते हैं। बड़े मशीनों और एलएनटी का उपयोग कर रात के समय खनन किया जा रहा है और पत्थरों को राज्य से बाहर भेजा जा रहा है।

अवैध खनन का पर्यावरण पर भी गंभीर प्रभाव पड़ा है। डस्ट और धूल के नियंत्रित प्रबंधन के अभाव में आसपास का क्षेत्र प्रदूषित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि रात में हो रहे खनन और पत्थर भेजने की गतिविधियों से स्थानीय भूमि उपजाऊ से अनुपजाऊ होती जा रही है।

खनन विभाग के फोरमैन वीरेंद्र सिंह ने संवाददाता से बातचीत में कहा कि चिन्हित खनन स्थलों पर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रशासनिक उदासीनता और मिलीभगत के कारण नियमों का उल्लंघन वर्षों से जारी है।

यह स्थिति न केवल राज्य सरकार के राजस्व नुकसान का कारण बन रही है, बल्कि सामाजिक, पर्यावरणीय और कृषि क्षेत्र पर भी गंभीर प्रभाव डाल रही है। भुसावर उपखंड में अवैध क्रेशरों की अनियंत्रित गतिविधियां क्षेत्र की सुरक्षा और विकास के लिए चुनौती बन चुकी हैं।

Pratahkal Bureau

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