बयाना के कचैरा में प्रशासन का पीला पंजा: नहर की जमीन से हिलाया सालों पुराना अतिक्रमण, मची खलबली
भरतपुर के बयाना में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कचैरा गांव में नहर की जमीन से अवैध अतिक्रमण हटाया। तहसीलदार लालचंद वर्मा और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में जेसीबी चलाकर 2500 मीटर लंबी सरकारी भूमि को मुक्त कराया गया। सीएमओ पोर्टल पर शिकायत के बाद हुई इस कार्रवाई से भू-माफियाओं में हड़कंप मच गया है। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

बयाना। राजस्थान के भरतपुर जिले के बयाना उपखंड में गुरुवार को कानून का डंडा उस वक्त गरजा, जब प्रशासन ने भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कचैरा गांव में सालों से सरकारी नहर की जमीन को अपनी जागीर समझकर कुंडली मार कर बैठे लोगों के मंसूबों पर उस समय पानी फिर गया, जब भारी पुलिस बल के साथ जेसीबी मशीनों ने मौके पर पहुंचकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इस बड़ी कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया और अतिक्रमणकारियों में अफरा-तफरी का माहौल देखा गया।
यह पूरा मामला कचैरा एवं नयागांव खुर्द से होकर गुजरने वाली करीब 2500 मीटर लंबी 'गैर मुमकिन नहर' का है। यह बेशकीमती सरकारी भूमि राजस्व रिकॉर्ड में सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के नाम दर्ज है, लेकिन बीते लंबे समय से इस पर अवैध कब्जे की दीवारें खड़ी कर दी गई थीं। अतिक्रमण की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी थीं कि इसकी गूंज मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) तक पहुंची। सीएमओ पोर्टल पर दर्ज शिकायतों और जिला प्रशासन के सख्त रुख के बाद गुरुवार को इस अवैध साम्राज्य को ढहाने का खाका तैयार किया गया।
कार्रवाई की कमान संभाल रहे तहसीलदार लालचंद वर्मा ने मौके पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर किसी भी व्यक्ति का निजी अधिकार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने इस अभियान को इतनी सटीकता से अंजाम दिया कि अतिक्रमणकारियों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। सुरक्षा के लिहाज से मौके पर भारी पुलिस जाप्ता तैनात किया गया था, जिसमें महिला पुलिस बल की मौजूदगी ने यह सुनिश्चित किया कि किसी भी प्रकार के विरोध या अप्रिय स्थिति को तुरंत नियंत्रित किया जा सके।
इस संयुक्त ऑपरेशन में राजस्व विभाग, पुलिस और सार्वजनिक निर्माण विभाग के बीच बेहतरीन समन्वय देखने को मिला। मौके पर बयाना कोतवाली प्रभारी राम गिलास, पटवारी रोहित और PWD अधिकारी राम अवतार गुर्जर सहित दर्जनों कर्मचारी मुस्तैद रहे। जेसीबी की गर्जना के बीच एक-एक कर अवैध निर्माणों को ढहाया गया। प्रशासन के इस कड़े रुख ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा करने वालों के दिन अब लद चुके हैं। यह कार्रवाई न केवल नहर के अस्तित्व को बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि क्षेत्र के अन्य अतिक्रमणकारियों के लिए भी एक कड़ी चेतावनी है कि कानून के हाथ उन तक पहुंचने में ज्यादा देर नहीं लगेगी।

Pratahkal Bureau
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