डीग, 20 दिसंबर। सुशासन को कागज़ों से निकालकर ज़मीन पर उतारने की दिशा में डीग जिला प्रशासन ने सुशासन सप्ताह-2025 के तहत एक ठोस और संवेदनशील पहल की है। ‘प्रशासन गांव की ओर’ अभियान के माध्यम से जिले के दूरस्थ ग्रामीण अंचलों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक लगाए गए शिविरों ने आमजन को यह भरोसा दिलाया कि सरकार अब उनके द्वार पर है। खोह से लेकर कठौल तक आयोजित शिविरों में न केवल समस्याओं का दस्तावेजीकरण हुआ, बल्कि अनेक मामलों में उसी दिन निस्तारण कर राहत भी दी गई।

बुधवार को डीग उपखंड की ग्राम पंचायत खोह, कुम्हेर उपखंड की ग्राम पंचायत अजान और तालफरा, कामां-पहाड़ी उपखंड की ग्राम पंचायत कठौल और भौरी तथा नगर उपखंड के नगर कस्बे में प्रशासनिक शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों में अधिकारियों ने चौपाल की परंपरा को पुनर्जीवित करते हुए ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं। नामांतरण, पेंशन सत्यापन, राजस्व रिकॉर्ड शुद्धि और पट्टे जारी करने जैसे मामलों को मिशन मोड में निपटाया गया। समानांतर रूप से जिले में आयोजित ‘शहरी समस्या समाधान शिविरों’ में भी नागरिकों की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली, जहां एकल खिड़की व्यवस्था के तहत त्वरित समाधान उपलब्ध कराया गया।

इन शिविरों की प्रभावशीलता की सबसे सशक्त मिसाल कामां पंचायत समिति की ग्राम पंचायत नौनेरा से सामने आई। नौनेरा निवासी जसमत पुत्र तेजपाल वर्षों से अपने पुश्तैनी मकान के मालिकाना हक के दस्तावेज के लिए भटक रहे थे। मकान होने के बावजूद पट्टा नहीं होने के कारण वे बैंक ऋण लेने में असमर्थ थे, जिससे उनके रोजगार और भविष्य की संभावनाएं सीमित हो गई थीं। शिविर में आवेदन करते ही प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी की और उसी दिन जसमत को मकान का पट्टा सौंप दिया। पट्टा हाथ में आते ही उनकी आंखों में संतोष और उम्मीद की चमक साफ दिखाई दी। जसमत ने भावुक होकर कहा कि वर्षों का इंतजार चंद घंटों में खत्म हो गया और अब वे बैंक से ऋण लेकर अपने भविष्य को संवार सकेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री महोदय और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

जिला प्रशासन का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि सुशासन सप्ताह केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन में वास्तविक और गुणात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम है। शिविरों में प्राप्त सभी परिवेदनाओं को ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कर उनकी नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि समाधान केवल तात्कालिक न होकर स्थायी हो। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही पर विशेष जोर दिया गया है।

बुधवार को आयोजित इन शिविरों में संबंधित उपखंड अधिकारी, तहसीलदार और विकास अधिकारी स्वयं उपस्थित रहे। उन्होंने व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए यह सुनिश्चित किया कि कोई भी पात्र व्यक्ति लाभ से वंचित न रहे। डीग जिले में सुशासन सप्ताह के तहत चलाया गया यह अभियान प्रशासनिक संवेदनशीलता, त्वरित निर्णय क्षमता और जनहितकारी दृष्टिकोण का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है, जिसने प्रशासन और आमजन के बीच विश्वास की खाई को पाटने का काम किया है।

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Pratahkal Bureau

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