भरतपुर में विश्व हिंदी दिवस पर काव्य रस की वर्षा: हिंदी को बताया राष्ट्र की सांस्कृतिक आत्मा
भरतपुर के टेक्नोलॉजी पार्क में विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर पंख फाउंडेशन और सर्व समाज महासभा द्वारा आयोजित भव्य कवि सम्मेलन में देशप्रेम और हिंदी गौरव की गूँज सुनाई दी। डॉ. कृष्ण कन्हैया शर्मा और डॉ. अविनाश सोनी की ओजस्वी कविताओं ने जहाँ जोश भरा, वहीं मार्मिक रचनाओं ने श्रोताओं को भावुक कर दिया। मुख्य अतिथियों ने कवियों को सम्मानित कर हिंदी को राष्ट्र की सांस्कृतिक आत्मा बताया।

भरतपुर। राजस्थान की सांस्कृतिक नगरी भरतपुर में विश्व हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में शब्दों और संवेदनाओं का एक अनूठा संगम देखने को मिला। पंख फाउंडेशन एवं सर्व समाज महासभा के संयुक्त तत्वावधान में सेवर स्थित टेक्नोलॉजी पार्क में आयोजित भव्य काव्य पाठ, कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह ने न केवल हिंदी के गौरव को प्रतिष्ठित किया, बल्कि राष्ट्रप्रेम और मानवीय भावनाओं की अविरल धारा से श्रोताओं को सराबोर कर दिया। कार्यक्रम का आगाज़ जहाँ हिंदी की महत्ता को प्रतिपादित करने के साथ हुआ, वहीं कवियों की ओजस्वी और मार्मिक प्रस्तुतियों ने देर शाम तक समां बांधे रखा।
समारोह में मंच से काव्य पाठ करते हुए रचनाकारों ने देश की मिट्टी, पिता का संघर्ष और हिंदी के प्रति अटूट प्रेम को स्वर दिए। कवि कृष्णा ने जब अपनी पंक्तियाँ “बूढ़े दरख़्त के साए के जैसा हूं, पिता हूं दर्द में फाय के जैसा हूं” पढ़ीं, तो पूरा वातावरण भावुकता से भर गया। वहीं लोकेंद्र सुमन ने अपनी रचना के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया कि वे एक ऐसे हिंदुस्तानी हैं जो केवल हिंदी के अस्तित्व की कामना करते हैं। आत्मविश्वास की प्रतिमूर्ति प्रियंका पुरोहित ने “मेरी खूबसूरती मेरे चेहरे में नहीं, मेरे हौसलों में है” के माध्यम से नारी शक्ति और स्वाभिमान को रेखांकित किया, जबकि प्रिया शुक्ला की पंक्तियों “भाग्य की रेखाएं गढ़ती सदा…” ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
जैसे-जैसे शाम गहराती गई, काव्य सरिता के विभिन्न रंग निखर कर सामने आए। गोविंद डागौर की प्रेममयी कविता “फिर वही चांदनी, फिर वही रात हो…” ने माहौल को सुरम्य बना दिया, तो वेद प्रकाश शर्मा ‘वेद’ ने “हमारी जान है हिंदी, हमारा प्राण है हिंदी” के उद्घोष से भाषा की अस्मिता को जगाया। देशप्रेम और शौर्य की बात चली तो डॉ. अविनाश सोनी ने अपनी तीखी पंक्तियों से पड़ोसी मुल्क पर कटाक्ष करते हुए भरतपुर के तेवर दिखाए, जिसे सुनकर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। इसी कड़ी में डॉ. कृष्ण कन्हैया शर्मा की वीर रस की पंक्तियाँ “या तो तेरा बेटा चला आएगा तिरंगा ओड, या ये तिरंगा सीमा पार गढ़ जाएगा” ने उपस्थित जनसमूह में देशभक्ति का जबरदस्त जोश भर दिया।
काव्य यज्ञ में पूरन शर्मा, ललितेश कुशवाह और राजीव चौधरी जैसे दिग्गज कवियों ने भी अपनी अनूठी प्रस्तुतियों से साहित्यिक गरिमा को बढ़ाया। कार्यक्रम में छह नवोदित कवियों को भी मंच प्रदान किया गया, जिन्होंने अपनी प्रतिभा से भविष्य की उज्ज्वल तस्वीर पेश की। मुख्य अतिथि डॉ. आलोक शर्मा, विशिष्ट अतिथि सर्व समाज महासभा के जिला अध्यक्ष ओमप्रकाश सिंघल एवं एडिशनल एसपी गणपत लाल महावर ने सभी कवियों का दुपट्टा पहनाकर और प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मान किया। ओमप्रकाश सिंघल ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी मात्र संवाद का साधन नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक आत्मा है।
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में सहसंयोजक कृष्णकांत शर्मा, रणजीत सिंह, सरोज शर्मा, जीवनलाल शर्मा, लक्ष्मी शर्मा सहित ब्लॉगर शिवम शर्मा और रोहित जांगिड़ का महत्वपूर्ण योगदान रहा। समारोह का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि हिंदी को जन-जन की भाषा बनाने और राष्ट्रप्रेम की अलख जगाने का यह सिलसिला निरंतर जारी रहेगा।

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