बयाना। क्या आधुनिकता की अंधी दौड़ में इंसानियत अब भी जिंदा है? क्या कोई व्यक्ति बेजुबान पक्षियों के सुख-चैन के लिए अपनी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा निस्वार्थ भाव से समर्पित कर सकता है? राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित बयाना कस्बे ने इन सवालों का उत्तर एक बेहद खूबसूरत और जीवंत मिसाल के रूप में दिया है। बयाना से लहचोरा खुर्द मार्ग पर कृष्ण गौशाला के ठीक सामने खेतों की हरियाली के बीच एक ऐसी गगनचुंबी संरचना खड़ी की गई है, जो राहगीरों के कदम ठिठकने पर मजबूर कर देती है। यह कोई रिहायशी बंगला नहीं, बल्कि बयाना निवासी सतीश नारंग की पक्षी प्रेम की वो पराकाष्ठा है, जिसे अब इलाके में 'पक्षियों के राजमहल' के तौर पर जाना जा रहा है।

प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति अपनी अटूट संवेदनाओं को मूर्त रूप देते हुए सतीश नारंग ने इस भव्य पक्षी घर का निर्माण करवाया है। इस परियोजना की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे तैयार करने के लिए विशेष रूप से गुजरात के कुशल कारीगरों को बुलाया गया था। करीब दो महीने के कठिन परिश्रम और बारीकी से किए गए काम के बाद यह अनूठा आशियाना बनकर तैयार हुआ है। सतीश नारंग ने बताया कि इस पूरे ढांचे के निर्माण में लगभग 7 लाख रुपये की लागत आई है। सफेद और आकर्षक नक्काशी वाली यह बहुमंजिला संरचना आधुनिक वास्तुकला और करुणा का अनूठा संगम है, जिसमें एक साथ करीब 2500 पक्षियों के सुरक्षित आवास की व्यवस्था की गई है।

यह केवल ईंट और पत्थर से बना एक ढांचा मात्र नहीं है, बल्कि विलुप्त होते जा रहे पक्षियों के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा वैचारिक बदलाव है। इस चिड़ियाघर का स्थान चयन भी बेहद सोच-समझकर किया गया है, जहाँ पक्षियों को शोर-शराबे से दूर एक शांत और प्राकृतिक वातावरण मिल सके। सतीश नारंग की यह संवेदनशीलता केवल घर बनाने तक ही सीमित नहीं है; पक्षियों के भोजन के लिए कृष्ण गौशाला की छत पर नियमित रूप से दाने और पानी का प्रबंध भी किया जाता है, ताकि इन नन्हे मेहमानों को भोजन की तलाश में भटकना न पड़े।

इस अभूतपूर्व पहल को लेकर स्थानीय निवासियों में भारी उत्साह और सम्मान का भाव है। स्थानीय निवासी के अनुसार, आज के समय में जहाँ लोग अपनी जरूरतों के लिए पेड़ों की अंधाधुंध कटाई कर रहे हैं, वहीं सतीश नारंग द्वारा पक्षियों के संरक्षण के लिए उठाया गया यह कदम समाज के लिए एक प्रेरणापुंज है। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का पाठ भी पढ़ाती है। बयाना का यह अनोखा पक्षी घर आज मानवीय संवेदनाओं का प्रतीक बनकर चमक रहा है, जो यह संदेश देता है कि यदि इच्छाशक्ति दृढ़ हो, तो विकास और प्रकृति के बीच एक सुंदर संतुलन कायम किया जा सकता है।

Devisingh Prajapat, Bharatpur

Devisingh Prajapat, Bharatpur

नाम: देवीसिंह प्रजापत

कार्यक्षेत्र: बयाना उपखंड / उप जिला बयाना (राजस्थान)

अनुभव: 15 वर्ष

बीट (मुख्य विषय): सर्वपक्षीय समाचार (सभी तरह की खबरें और ग्राउंड रिपोर्टिंग)

परिचय 

देवीसिंह प्रजापत राजस्थान के बयाना उपखंड क्षेत्र के एक अत्यंत अनुभवी, निष्पक्ष और सक्रिय पत्रकार हैं। वह मुख्य रूप से उप जिला बयाना और संपूर्ण बयाना उपखंड की हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर पैनी नजर रखते हैं। स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं, विकास कार्यों से लेकर क्षेत्र की हर प्रमुख हलचल और सभी तरह की खबरों को प्रमुखता व प्रामाणिकता के साथ पाठकों तक पहुंचाना उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषता है।

पत्रकारिता का व्यापक अनुभव (Work Experience)

देवीसिंह प्रजापत जी को मीडिया जगत का एक लंबा और समृद्ध अनुभव है। वह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। इस डेढ़ दशक के सफर में उन्होंने मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स (प्रिंट, डिजिटल व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) पर काम किया है, जिससे उन्हें ग्राउंड रिपोर्टिंग और क्षेत्रीय मुद्दों की गहरी समझ है।

शैक्षणिक योग्यता

देवीसिंह प्रजापत जी शैक्षणिक रूप से बेहद सुदृढ़ हैं। उन्होंने विज्ञान स्नातक (B.Sc.) के साथ-साथ बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग (B.E.) की डिग्री हासिल की है। उनकी यह तकनीकी और तार्किक पृष्ठभूमि उन्हें खबरों के विश्लेषण, तथ्यों की जांच और समसामयिक मुद्दों को एक वैज्ञानिक व सटीक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने में सक्षम बनाती है।

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