भुसावर। भक्ति, शक्ति और अटूट लोक आस्था का एक अनूठा दृश्य आज भुसावर उपखंड क्षेत्र में देखने को मिला, जहां प्राचीन धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए विशाल अन्नकूट महोत्सव का आयोजन संपन्न हुआ। मूसेपुर सड़क मार्ग स्थित सिद्ध पीठ प्राचीन खेरे वाली चांवड माता के दरबार और नयागांव सड़क मार्ग स्थित बड वाले शिम्भू हनुमानजी मंदिर के समीप भूमिया बाबा मंदिर परिसर में आयोजित इस महोत्सव ने क्षेत्र को पूरी तरह धर्ममय कर दिया। 11 मन शुद्ध सामग्री से तैयार किए गए विशेष महाप्रसाद को ग्रहण करने के लिए न केवल कस्बे के लोग, बल्कि दूर-दराज के गांवों से आए हजारों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे समूचा क्षेत्र माता के जयकारों और लांगुरिया के गीतों से गुंजायमान हो उठा।

दो दिवसीय इस धार्मिक अनुष्ठान का भव्य समापन रविवार, 18 जनवरी को महाप्रसादी वितरण के साथ हुआ। आयोजन की व्यापकता का अनुमान इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि प्रसादी तैयार करने में 11 मन शुद्ध सामग्री का उपयोग किया गया। इसमें बाजरा, चावल, राजमा, चौला, मूंगफली, किशमिश, बेसन, तेल, छाछ, गुड़ और विभिन्न प्रकार की मिक्स सब्जियों के साथ-साथ पारंपरिक पकवान 'पुआ और पकोड़े' विशेष रूप से तैयार किए गए थे। चांवड माता और भूमिया बाबा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना और भव्य महाआरती के पश्चात जैसे ही प्रसादी वितरण शुरू हुआ, श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। राहगीरों से लेकर स्थानीय ग्रामीणों तक, हर किसी ने कतारबद्ध होकर श्रद्धा भाव से प्रसादी ग्रहण की और क्षेत्र की खुशहाली व समृद्धि की कामना की।

इससे पूर्व, शनिवार 17 जनवरी को खेरे वाली चांवड माता के दरबार में विशेष धार्मिक आयोजनों की शुरुआत हुई थी। मंदिर में फूलों का बंगला सजाकर माता का मनमोहक और आकर्षक श्रृंगार किया गया, जिसे देखने के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। देर शाम मां भगवती जागरण मंडल के स्थानीय व बाहरी कलाकारों ने भजनों की अमृत वर्षा की, जिसमें श्रद्धालु रात भर झूमते नजर आए। चांवड माता के पुजारी दुर्गा प्रसाद कोली और कन्हैया लाल सैनी के साथ-साथ भूमिया बाबा मंदिर समिति के सदस्य प्यारे लाल, सुरेश प्रजापत और चन्द्रेश ने बताया कि यह भव्य आयोजन भक्त मंडल और समस्त क्षेत्रवासियों के सामूहिक सहयोग का परिणाम है।

इस पावन अवसर पर महिला श्रद्धालुओं और सनातन धर्म प्रेमियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। ढोलक, झांझ और मजीरों की थाप पर महिलाएं नृत्य कर अपनी अरदास लगा रही थीं। आस्था के इस महाकुंभ ने न केवल धार्मिक एकजुटता का संदेश दिया, बल्कि यह सिद्ध कर दिया कि आधुनिकता के दौर में भी लोक देवताओं और शक्ति स्वरूपा माता के प्रति जनमानस में अटूट विश्वास कायम है। यह महोत्सव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ, जिसने भुसावर की धार्मिक विरासत में एक नया और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है।

Pratahkal Bureau

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