भुसावर में आस्था का सैलाब: रिमझिम बारिश के बीच गूंजे जयकारे, भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा का शंखनाद
भुसावर के लक्ष्मी नगर में रिमझिम बारिश के बीच भव्य कलश यात्रा के साथ सात दिवसीय श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ हुआ। वृन्दावन के पंडित योगेन्द्र कृष्ण शास्त्री महाराज ने कथा के पहले दिन श्रद्धालुओं को मृत्यु के भय से मुक्ति और भागवत के आध्यात्मिक महत्व के बारे में बताया। जानिए इस भव्य धार्मिक आयोजन और कलश यात्रा की पूरी रिपोर्ट।

भुसावर। भक्ति, शक्ति और समर्पण का अनूठा संगम आज कस्बे की सड़कों पर उस समय देखने को मिला जब इंद्रदेव की अमृत रूपी फुहारों के बीच हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। अवसर था लक्ष्मी नगर स्थित पीडब्ल्यूडी ऑफिस के समीप आयोजित होने जा रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के भव्य शुभारंभ का। शुक्रवार, 23 जनवरी को कस्बे के मुख्य मार्गों से निकली मंगलमय कलश यात्रा ने पूरे क्षेत्र को धर्ममयी आभा से सराबोर कर दिया, जिसमें भक्ति के रंग और श्रद्धा का उत्साह चरम पर दिखाई दिया।
कस्बे के बयाना सड़क मार्ग स्थित लक्ष्मी नगर से शुरू हुई इस शोभायात्रा में महिलाएं पारंपरिक रंग-बिरंगे परिधानों में सज्ज होकर सिर पर मंगल कलश धारण किए चल रही थीं। बैंड-बाजे की मधुर धुनों और भजनों की थाप पर थिरकते श्रद्धालुओं का कारवां बस स्टैंड, हिंडौन सड़क मार्ग, कानूनगो मोहल्ला, अनाज मंडी, मुख्य बाजार और छौकरबाड़ा सड़क मार्ग से होता हुआ कथा स्थल पहुँचा। इस दौरान समूचा भुसावर 'जय श्री कृष्णा' के उद्घोष से गुंजायमान रहा। माँ चामुण्डा एवं समस्त भूदर परिवार के भक्त मंडल के सदस्य डम्पी भास्कर पाण्डेय, हेमेंद्र पाण्डेय और नीरज ने बताया कि यह आयोजन विधादेवी पत्नी स्वर्गीय लक्ष्मीनारायण पाण्डेय के सानिध्य में समस्त भूदर परिवार द्वारा बिहारी जी की असीम कृपा से कराया जा रहा है।
कथा के प्रथम सोपान पर व्यासपीठ से अमृत वर्षा करते हुए श्री धाम वृन्दावन के सुप्रसिद्ध भागवत प्रवक्ता रसिक पंडित योगेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी महाराज ने श्रद्धालुओं को जीवन का सार समझाया। उन्होंने कहा कि भागवत जीव को ज्ञान, भक्ति और कर्म के त्रिवेणी संगम से जोड़ती है। शास्त्री जी ने मार्मिक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जिस प्रकार राजा परीक्षित ने श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कर मृत्यु के भय को जीत लिया और अभय पद को प्राप्त किया, ठीक उसी प्रकार यह कथा मनुष्य के भीतर से काल का डर मिटाकर उसे ईश्वरीय चेतना से साक्षात्कार कराती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मृत्यु को जान लेने मात्र से ही मन का भय समाप्त हो जाता है।
आयोजन समिति के अनुसार, यह संगीतमय ज्ञान यज्ञ 23 जनवरी से प्रारंभ होकर आगामी 30 जनवरी तक चलेगा, जिसका समापन पूर्ण आहुति और भव्य प्रसादी वितरण के साथ होगा। कथा का समय प्रतिदिन प्रातः 11 बजे से सायं 5 बजे तक निर्धारित किया गया है। भक्ति और श्रद्धा के इस महाकुंभ में समस्त भूदर परिवार और माँ चामुण्डा भक्त मंडल के सदस्य सेवा कार्यों में जुटे हुए हैं, ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु इस आध्यात्मिक रसपान का आनंद ले सकें।

Pratahkal Bureau
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