भुसावर में आस्था का सैलाब: मकर संक्रांति पर श्रद्धा और सेवा का अनूठा संगम, 21 किलो खिचड़ी के भोग से महका कोठी वाले हनुमान मंदिर
भुसावर में मकर संक्रांति के पावन पर्व पर कोठी वाले हनुमानजी मंदिर में भक्ति और सेवा का अद्भुत संगम दिखा। भक्त मंडल के रोहित कुमार और रवि घट्टर वाले के नेतृत्व में 21 किलो खिचड़ी का ठाकुर जी को भोग लगाकर वितरण किया गया। कड़ाके की ठंड में श्रद्धालुओं ने दान-पुण्य और गौ सेवा कर सुख-समृद्धि की कामना की।

भुसावर। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर कस्बे सहित पूरे उपखंड क्षेत्र में बुधवार को सनातन संस्कृति और सामाजिक समरसता का एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी को भक्ति के रंग में सराबोर कर दिया। हाड़ कंपा देने वाली शीतलहर और कड़ाके की ठंड के बीच जब आस्था की लौ जली, तो समूचा क्षेत्र जयकारों से गुंजायमान हो उठा। कस्बे के हिंडौन सड़क मार्ग स्थित प्राचीन कोठी वाले हनुमानजी मंदिर में आयोजित विशेष धार्मिक अनुष्ठान और सेवा कार्य ने इस पर्व को यादगार बना दिया, जहां भक्ति के साथ-साथ मानवता की सेवा की अनूठी मिसाल पेश की गई।
पर्व की शुरुआत बुधवार तड़के से ही मंदिरों और घरों में विशेष प्रार्थनाओं के साथ हुई। श्रद्धालुओं ने भगवान के चरणों में अरदास लगाकर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। सनातन धर्म प्रेमियों ने भगवान को रिझाने के लिए गर्म और स्वादिष्ट व्यंजनों का भोग लगाया, जिसमें पुआ, पकौड़े, गुड़, तिल की गजक, रेवड़ी और तिल की बर्फी मुख्य आकर्षण रहे। इस दौरान महिलाओं ने परंपरा का निर्वहन करते हुए 14 प्रकार की वस्तुएं मनसकर अपने से बड़ी महिलाओं के चरण स्पर्श किए और उनका आशीर्वाद लिया, जिससे वातावरण में पारिवारिक सौहार्द की खुशबू फैल गई।
विशेष आकर्षण का केंद्र हिंडौन रोड स्थित प्राचीन कोठी वाले हनुमानजी मंदिर रहा। यहाँ भक्त मंडल के सक्रिय सदस्य रोहित कुमार और रवि घट्टर वाले के नेतृत्व में सामूहिक सहभागिता की एक भव्य तस्वीर उभरी। मंदिर परिसर में गुरुवार की अलसुबह रोहित शर्मा और डव्वू जती जैसे पुजारियों ने घंटे-घड़ियाल, ढोलक, झांझ और मजीरों की थाप पर ठाकुर जी, हनुमानजी, शिव परिवार और भैरव बाबा की विशेष आराधना की। भक्ति की इस पराकाष्ठा के बीच 21 किलो शुद्ध सामग्री से तैयार की गई गरमा-गरम खिचड़ी का ठाकुर जी को भोग लगाया गया। मंदिर परिसर में उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुओं और राहगीरों के बीच जब इस महाप्रसादी का वितरण शुरू हुआ, तो शीतलहर के प्रकोप के बीच लोगों को न केवल शारीरिक राहत मिली, बल्कि उनके चेहरों पर आत्मिक संतोष भी दिखाई दिया।
धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ इस दिन दान-पुण्य की गंगा भी बही। कस्बे के जागरूक नागरिकों ने सामाजिक समरसता और भाईचारे का परिचय देते हुए निर्धन, असहाय और जरूरतमंदों की मदद की। जीव सेवा के संकल्प के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु गौशालाओं में पहुंचे, जहां उन्होंने गौवंश को चारा, गुड़ और खल खिलाकर सामूहिक सेवा का पुण्य अर्जित किया। भुसावर में मकर संक्रांति का यह उत्सव केवल एक त्यौहार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने समाज के हर वर्ग को एकजुटता और परोपकार के सूत्र में बांधने का कार्य किया।

Pratahkal Bureau
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