योग से आंतरिक रूपांतरण और मानसिक शांति संभव: सत्यनारायण पांचाल
विद्या भारती के जिला योग शिक्षा प्रमुख ने जीवनशैली में सुधार और तनाव मुक्ति के लिए योग के वैज्ञानिक महत्व तथा आत्म-अनुशासन पर जोर दिया।

बारां में विद्या भारती संस्थान के जिला योग शिक्षा प्रमुख सत्यनारायण पांचाल वर्तमान जीवनशैली में योग के माध्यम से आंतरिक सुधार और चित्त शुद्धि के महत्व को समझाते हुए।
अक्सर यह देखा जाता है कि इंसान जीवन में सुख की खोज में घर, रिश्ते और मित्र बदलता रहता है, किंतु इसके बावजूद वह आंतरिक रूप से अशांत और परेशान ही रहता है। इसका मूलभूत कारण यह है कि मनुष्य बाहरी जगत को परिवर्तित करने का निरंतर प्रयास करता है, परंतु स्वयं के भीतर झांकने और सुधार करने की दिशा में कार्य नहीं करता। हम अपनी समस्त समस्याओं का समाधान भौतिक परिवर्तनों में तलाशते हैं, जबकि अशांति की वास्तविक जड़ें हमारे अपने भीतर और हमारे अनियंत्रित नजरिए में समाहित होती हैं। योग इस परिप्रेक्ष्य में मात्र शारीरिक मुद्राओं का अभ्यास नहीं, अपितु स्वयं को जानने, अनुशासित करने और आंतरिक सुधार की एक सतत वैज्ञानिक प्रक्रिया है।
विद्या भारती शिक्षण संस्थान, बारां के जिला योग शिक्षा प्रमुख सत्यनारायण पांचाल ने वर्तमान जीवनशैली पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के दौर में जहाँ तनाव और अवसाद निरंतर बढ़ रहे हैं, वहाँ योग हमें यह बोध कराता है कि वास्तविक शांति किसी स्थान या व्यक्ति विशेष में नहीं, बल्कि हमारे अपने संतुलित चित्त में निहित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि योग के अभ्यास से न केवल मांसपेशियां लचीली होती हैं, बल्कि मन की कठोरता और नकारात्मक संस्कारों का भी क्रमिक क्षय होता है। जब योग के माध्यम से चित्त की शुद्धि संपन्न होती है, तो व्यक्ति का संपूर्ण जगत के प्रति दृष्टिकोण परिवर्तित हो जाता है। यही आंतरिक रूपांतरण मनुष्य को कठिन समय में भी स्थिर रहने की आत्मशक्ति प्रदान करता है।
योग के महत्व को रेखांकित करते हुए पांचाल ने कहा कि अनुशासन ही वह सेतु है जो मानवीय संकल्प को सिद्धि तक पहुँचाता है। योग हमें आत्मानुशासन की शिक्षा देता है और जब हम अपनी इंद्रियों एवं श्वास पर नियंत्रण प्राप्त कर लेते हैं, तो बाहरी द्वंद्व हमें विचलित करना बंद कर देते हैं। निष्कर्षतः, योग हमें इस सत्य से साक्षात्कार कराता है कि यदि हम स्वयं को बदल लें, तो संपूर्ण जगत हमारे लिए बदल जाएगा। यह स्वयं की, स्वयं के माध्यम से, स्वयं तक की एक यात्रा है, जो अंततः एक श्रेष्ठ व्यक्तित्व का निर्माण करती है।

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