बारां में बजट की आहट के साथ कालाबाजारी का 'धुआं', बड़े कुबेरों के गोदामों में बंद हुआ तंबाकू, छोटे दुकानदार बेहाल
बारां जिले में आगामी बजट से पहले जर्दा, गुटखा और सिगरेट की भारी कालाबाजारी शुरू हो गई है। बड़े व्यापारियों द्वारा स्टॉक डंप करने से कीमतों में 20 रुपए तक का उछाल आया है, जिससे छोटे दुकानदारों का व्यापार चौपट हो रहा है। राजेंद्र शर्मा की इस विशेष रिपोर्ट में पढ़ें कैसे प्रशासन की ढिलाई और बड़े कारोबारियों की मिलीभगत से आम जनता पर महंगाई की मार पड़ रही है।

बारां। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा आगामी फरवरी-मार्च में पेश किए जाने वाले बजट की सुगबुगाहट ने बारां जिले के तंबाकू बाजार में खलबली मचा दी है। बजट में कर वृद्धि की संभावनाओं को भांपते हुए जिले के बड़े रसूखदार व्यापारियों ने जर्दा, गुटखा और सिगरेट का भारी मात्रा में स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया है। मुनाफे की इस अंधी दौड़ ने जिले में कृत्रिम अभाव की स्थिति पैदा कर दी है, जिससे न केवल आम उपभोक्ता बल्कि दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करने वाले छोटे दुकानदार भी पूरी तरह पस्त नजर आ रहे हैं।
बाजार की वर्तमान स्थिति यह है कि जर्दा, गुटखा और सिगरेट जैसे उत्पादों पर अचानक 10 से 20 रुपए तक की भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। बड़े थोक व्यापारी अब पुराने स्टॉक को नए ऊंचे दामों पर बाजार में उतार रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन उत्पादों पर सरकार ने पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है, वे भी इस कालाबाजारी के दौर में धड़ल्ले से महंगे दामों पर बेचे जा रहे हैं। प्रशासन की आंखों के सामने करोड़ों रुपए का यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति ही नजर आती है।
इस पूरे प्रकरण में सबसे अधिक प्रताड़ित छोटा दुकानदार हो रहा है। बारां के मुख्य बाजारों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक बोडी, ठेले और थड़ियों पर अपनी दुकान चलाने वाले दुकानदारों की पीड़ा असहनीय हो चुकी है। इन छोटे व्यापारियों का कहना है कि थोक विक्रेता उन्हें यह कहकर महंगा माल दे रहे हैं कि पीछे से ही सप्लाई महंगी हो रही है। इस कृत्रिम महंगाई के कारण छोटे दुकानदारों की बिक्री में भारी गिरावट आई है और उनके लिए परिवार का भरण-पोषण करना एक गंभीर चुनौती बन गया है। राजेंद्र शर्मा की रिपोर्ट के अनुसार, छोटे दुकानदारों में इस बात को लेकर भी गहरा रोष है कि प्रशासन का डंडा सिर्फ उन पर ही चलता है, जबकि ऊंचे रसूख वाले बड़े गोदाम मालिकों तक सरकारी तंत्र की पहुंच न के बराबर है।
एक तरफ स्वास्थ्य विभाग, नगर परिषद और विभिन्न सामाजिक संगठन पोस्टरों और रैलियों के जरिए तंबाकू से होने वाली जानलेवा बीमारियों के प्रति जनता को जागरूक कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जिले का यह संगठित कालाबाजारी तंत्र इन प्रयासों पर पानी फेर रहा है। बारां जिले और आसपास के क्षेत्रों में हर महीने करोड़ों रुपए के वारे-न्यारे हो रहे हैं, लेकिन प्रभावी नियंत्रण के अभाव में यह अवैध तंत्र और मजबूत होता जा रहा है। अब आम नागरिक और छोटे व्यापारी जिला प्रशासन से यह पुरजोर मांग कर रहे हैं कि पक्षपात रहित जांच की जाए और बड़े जमाखोरों के गोदामों पर छापेमारी कर प्रतिबंधित सामग्री की बिक्री रोकी जाए ताकि आम जनता और छोटे व्यापारियों को इस शोषण से राहत मिल सके।

Pratahkal Bureau
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