बारां। हाड़ौती की पावन धरा बारां में स्वामी विवेकानंद की जयंती और राष्ट्रीय युवा दिवस के उल्लास के बीच भारतीय वैचारिक चेतना का एक अनूठा संगम देखने को मिला। सोमवार को 'भारतीय इतिहास संकलन समिति' एवं 'एकल अभियान समिति' के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक गरिमामई विचार गोष्ठी ने न केवल स्वामी जी के प्रति श्रद्धा प्रकट की, बल्कि आधुनिक भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका को भी रेखांकित किया। राजस्थान अभियान संरक्षक आचार्य परमानंद के पावन सानिध्य में आयोजित इस समागम में समाज के विभिन्न वर्गों की सहभागिता ने यह सिद्ध कर दिया कि विवेकानंद के विचार आज भी उतने ही जीवंत और प्रेरणादायी हैं, जितने वे शिकागो के उस ऐतिहासिक भाषण के समय थे।

कार्यक्रम की आध्यात्मिक और वैचारिक नींव रखते हुए संभाग राजस्थान संरक्षक आचार्य परमानंद ने एकल अभियान की अंतर्धारा को स्वामी जी के दर्शन से जोड़ा। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि 'नर सेवा ही नारायण सेवा' मात्र एक नारा नहीं, बल्कि वह जीवन दर्शन है जो अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के उत्थान का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने गर्व के साथ भारतीयता को स्वीकारने की आवश्यकता पर बल दिया और बताया कि किस प्रकार सुदूर ग्रामीण अंचलों में संचालित एकल विद्यालय भावी पीढ़ी को शिक्षा और संस्कारों से अभिसिंचित कर स्वामी जी के सपनों का भारत गढ़ रहे हैं।

गोष्ठी के मुख्य वक्ता और संयोजक डॉ. सुरेश मेघवाल ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में विवेकानंद की वैश्विक प्रासंगिकता पर गहरा प्रकाश डाला। डॉ. मेघवाल ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि स्वामी जी के कालजयी विचार किसी एक युग की सीमा में नहीं बंधे हैं, बल्कि वे अनंत काल तक मानवता का मार्गदर्शन करते रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सच्ची श्रद्धांजलि प्रतीकों में नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को अपने आचरण में उतारने में निहित है। डॉ. मेघवाल के अनुसार, युवा ही राष्ट्र की शक्ति के केंद्र हैं और यदि वे चारित्रिक दृढ़ता के साथ देशहित को सर्वोपरि रखें, तो भारत को पुनः विश्व गुरु के पद पर आसीन होने से कोई नहीं रोक सकता।

बौद्धिक विमर्श के इस वातावरण में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने अपनी अनूठी छाप छोड़ी। स्थानीय महाविद्यालय की इतिहासवेत्ताओं द्वारा स्वामी जी के जीवन दर्शन पर आधारित एक ओजपूर्ण गीत की प्रस्तुति दी गई। राष्ट्रभक्ति के सुरों में पिरोए गए इस गीत ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया और पूरे परिसर में एक नई ऊर्जा का संचार किया। वक्ताओं ने एक स्वर में स्वामी विवेकानंद को आधुनिक मानवता का प्रकाश स्तंभ और एक ऐसा युगपुरुष बताया, जिन्होंने वैश्विक मंच पर भारतीय अध्यात्म का लोहा मनवाया। कार्यक्रम का समापन एक संकल्प के साथ हुआ, जब सभी प्रबुद्धजनों ने स्वामी जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके बताए मार्ग पर चलने की शपथ ली।

Rajendra Sharma, Baran

Rajendra Sharma, Baran

नाम: राजेंद्र शर्मा

वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)

कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर

परिचय 

राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

  • राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
  • राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
  • दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
  • दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
  • दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
  • अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

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