बारां में गूंजा विवेकानंद का शंखनाद: डॉ. सुरेश मेघवाल बोले- युवाओं के चरित्र निर्माण से ही संभव है राष्ट्र का पुनरुत्थान
बारां में राष्ट्रीय युवा दिवस पर आयोजित विचार गोष्ठी में डॉ. सुरेश मेघवाल ने स्वामी विवेकानंद के विचारों को आज के युवाओं के लिए अनिवार्य बताया। आचार्य परमानंद के सानिध्य में 'नर सेवा ही नारायण सेवा' के संकल्प के साथ एकल अभियान के महत्व और स्वामी जी के कालजयी जीवन दर्शन पर विस्तृत चर्चा की गई। जानिए कैसे विवेकानंद का संदेश आज भी राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति है।

बारां। हाड़ौती की पावन धरा बारां में स्वामी विवेकानंद की जयंती और राष्ट्रीय युवा दिवस के उल्लास के बीच भारतीय वैचारिक चेतना का एक अनूठा संगम देखने को मिला। सोमवार को 'भारतीय इतिहास संकलन समिति' एवं 'एकल अभियान समिति' के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक गरिमामई विचार गोष्ठी ने न केवल स्वामी जी के प्रति श्रद्धा प्रकट की, बल्कि आधुनिक भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका को भी रेखांकित किया। राजस्थान अभियान संरक्षक आचार्य परमानंद के पावन सानिध्य में आयोजित इस समागम में समाज के विभिन्न वर्गों की सहभागिता ने यह सिद्ध कर दिया कि विवेकानंद के विचार आज भी उतने ही जीवंत और प्रेरणादायी हैं, जितने वे शिकागो के उस ऐतिहासिक भाषण के समय थे।
कार्यक्रम की आध्यात्मिक और वैचारिक नींव रखते हुए संभाग राजस्थान संरक्षक आचार्य परमानंद ने एकल अभियान की अंतर्धारा को स्वामी जी के दर्शन से जोड़ा। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि 'नर सेवा ही नारायण सेवा' मात्र एक नारा नहीं, बल्कि वह जीवन दर्शन है जो अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के उत्थान का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने गर्व के साथ भारतीयता को स्वीकारने की आवश्यकता पर बल दिया और बताया कि किस प्रकार सुदूर ग्रामीण अंचलों में संचालित एकल विद्यालय भावी पीढ़ी को शिक्षा और संस्कारों से अभिसिंचित कर स्वामी जी के सपनों का भारत गढ़ रहे हैं।
गोष्ठी के मुख्य वक्ता और संयोजक डॉ. सुरेश मेघवाल ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में विवेकानंद की वैश्विक प्रासंगिकता पर गहरा प्रकाश डाला। डॉ. मेघवाल ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि स्वामी जी के कालजयी विचार किसी एक युग की सीमा में नहीं बंधे हैं, बल्कि वे अनंत काल तक मानवता का मार्गदर्शन करते रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सच्ची श्रद्धांजलि प्रतीकों में नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को अपने आचरण में उतारने में निहित है। डॉ. मेघवाल के अनुसार, युवा ही राष्ट्र की शक्ति के केंद्र हैं और यदि वे चारित्रिक दृढ़ता के साथ देशहित को सर्वोपरि रखें, तो भारत को पुनः विश्व गुरु के पद पर आसीन होने से कोई नहीं रोक सकता।
बौद्धिक विमर्श के इस वातावरण में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने अपनी अनूठी छाप छोड़ी। स्थानीय महाविद्यालय की इतिहासवेत्ताओं द्वारा स्वामी जी के जीवन दर्शन पर आधारित एक ओजपूर्ण गीत की प्रस्तुति दी गई। राष्ट्रभक्ति के सुरों में पिरोए गए इस गीत ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया और पूरे परिसर में एक नई ऊर्जा का संचार किया। वक्ताओं ने एक स्वर में स्वामी विवेकानंद को आधुनिक मानवता का प्रकाश स्तंभ और एक ऐसा युगपुरुष बताया, जिन्होंने वैश्विक मंच पर भारतीय अध्यात्म का लोहा मनवाया। कार्यक्रम का समापन एक संकल्प के साथ हुआ, जब सभी प्रबुद्धजनों ने स्वामी जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके बताए मार्ग पर चलने की शपथ ली।

Pratahkal Bureau
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