बारां। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा जारी वरिष्ठ कंप्यूटर अनुदेशक एवं बेसिक कंप्यूटर अनुदेशक संयुक्त सीधी भर्ती-2026 अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक विवाद का केंद्र बनती जा रही है। इस भर्ती में पदों के वर्गीकरण और ईडब्ल्यूएस (EWS) आरक्षण को लेकर सवर्ण समाज के भीतर भारी आक्रोश और गंभीर नाराजगी देखने को मिल रही है। इसी ज्वलंत मुद्दे पर बारां में विप्र सेना ने एक महत्वपूर्ण पत्रकार वार्ता का आयोजन कर सीधे राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिससे प्रदेश की सियासत में गर्माहट आ गई है।

एक निजी रेस्तरां में आयोजित इस पत्रकार वार्ता में समाज के शीर्ष प्रतिनिधियों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि वर्तमान भर्ती प्रक्रिया में सामान्य वर्ग और ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों के साथ घोर अन्याय किया गया है। प्रतिनिधियों का कहना था कि कुल हजारों पदों पर निकाली गई इस बड़ी भर्ती में सामान्य वर्ग के हिस्से में अपेक्षाकृत बेहद कम पद दिए गए हैं, जिसके कारण योग्य युवाओं में सरकार के प्रति गहरा आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।

प्रेस वार्ता के दौरान समाज के प्रतिनिधियों ने तीखे शब्दों में कहा कि राज्य सरकार लगातार सवर्ण समाज की अनदेखी कर रही है और सरकारी नौकरियों में उनके अवसर बेहद सीमित किए जा रहे हैं। विप्र सेना के प्रदेश सलाहकार आशीष शर्मा के निर्देश पर आयोजित इस विशेष वार्ता में संगठन ने सरकार के समक्ष प्रमुखता से अपनी मांगें रखीं। इसके तहत राज्य सरकार से ईडब्ल्यूएस आरक्षण के दायरे को बढ़ाकर 14 प्रतिशत करने, कंप्यूटर अनुदेशक भर्ती में कुल सीटें बढ़ाकर सामान्य वर्ग को नियमानुसार उचित सीटें आवंटित करने तथा यूजीसी से जुड़े 'काले कानून' को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की पुरजोर मांग उठाई गई है।

मामले के कानूनी और आधिकारिक पक्षों को रेखांकित करते हुए समाज के प्रतिनिधि नीरज नयन शर्मा ने स्पष्ट रूप से कहा कि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा इस भर्ती में किया गया पदों का वर्गीकरण किसी भी स्तर पर पारदर्शी और संतुलित नहीं है। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप मढ़ा कि विसंगतियों के चलते नियमानुसार मिलने वाला वास्तविक लाभ सवर्ण एवं ब्राह्मण वर्ग के हकदार युवाओं को नहीं मिल पा रहा है, जो कि उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

इस विवाद ने अब एक गंभीर रुख अख्तियार कर लिया है, क्योंकि समाज के प्रतिनिधियों ने राज्य सरकार को स्पष्ट रूप से 7 दिन का कड़ा अल्टीमेटम थमा दिया है। विप्र सेना ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समयावधि के भीतर उनकी इन जायज मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो पूरे प्रदेशभर में उग्र आंदोलन का बिगुल फूंका जाएगा। इस प्रेस वार्ता में राजेंद्र तिवारी, महेंद्र शर्मा, मनीष गौतम, अनिल शर्मा, दीपक शर्मा, तेजेश शर्मा और चेतन व्यास सहित विप्र समाज के कई प्रमुख पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिनकी उपस्थिति इस आंदोलन के व्यापक सामाजिक प्रभाव को दर्शाती है।

Rajendra Sharma, Baran

Rajendra Sharma, Baran

नाम: राजेंद्र शर्मा

वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)

कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर

परिचय 

राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

  • राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
  • राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
  • दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
  • दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
  • दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
  • अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

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