शहर के कॉलोनाइजर विनोद अदलक्खा ने सरकार, नगर परिषद और नगर पालिकाओं को सुझाव दिया है कि रेरा के नियम केवल मल्टीस्टोरी बिल्डिंग पर ही लागू होने चाहिए। उन्होंने आवासीय कॉलोनियों पर रेरा के अतिरिक्त पंजीकरण के भार को हटाने की वकालत की है।

विनोद अदलक्खा का कहना है कि यदि कोई कॉलोनाइजर कृषि भूमि पर आवासीय कॉलोनी विकसित करना चाहता है और नगर परिषद या नगरपालिका के माध्यम से भू-उपयोग परिवर्तन करवाकर प्लॉट बेचना चाहता है, तो उसे पहले से ही कॉलोनी में मूलभूत सुविधाओं की पूरी व्यवस्था करनी होती है। इनमें रोड, नाली, बिजली और पानी आदि की व्यवस्था शामिल है।

उन्होंने बताया कि विकास कार्य पूरा होने तक 12.5 प्रतिशत कन्वर्टेड एरिया नगर परिषद में गिरवी रखना पड़ता है। काम पूरा होने और पांच कर्मों के उपरांत ही जमीन को रिलीज किया जाता है।

ऐसी स्थिति में आवासीय कॉलोनियों पर रेरा का अतिरिक्त पंजीकरण करवाना केवल एक अतिरिक्त बोझ है। कॉलोनाइजर का तर्क है कि इस प्रकार के नियमों का आवासीय कॉलोनियों पर बार-बार या अतिरिक्त भार नहीं होना चाहिए।

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