विद्या भारती प्रशिक्षण वर्ग: पंचकोशात्मक विकास से श्रेष्ठ व्यक्तित्व निर्माण पर जोर
मंदारेश्वर में आयोजित प्रांतीय प्रशिक्षण वर्ग के चतुर्थ दिवस पर अखिल भारतीय मंत्री शिव प्रसाद ने शिक्षा दर्शन और राष्ट्रनिष्ठ व्यक्तित्व पर विचार साझा किए।

मंदारेश्वर स्थित विद्या निकेतन में आयोजित प्रांतीय ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण वर्ग के दौरान प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए विद्या भारती के अखिल भारतीय मंत्री शिव प्रसाद।
विद्या भारती के चित्तौड़ प्रांत के तत्वावधान में विद्या निकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय मंदारेश्वर में आयोजित पंचदिवसीय प्रांतीय ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण वर्ग के चतुर्थ दिवस पर भारतीय शिक्षा दर्शन, संस्कारयुक्त शिक्षण और राष्ट्रनिष्ठ व्यक्तित्व निर्माण को लेकर व्यापक चिंतन हुआ। प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए विद्या भारती के अखिल भारतीय मंत्री शिव प्रसाद ने कहा कि पंचकोशात्मक विकास ही श्रेष्ठ व्यक्तित्व निर्माण का वास्तविक आधार है। जब व्यक्ति केवल स्वयं के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए जीवन समर्पित करता है, तभी उसका व्यक्तित्व पूर्णता प्राप्त करता है।
उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा दर्शन में वर्णित अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनन्दमय कोश व्यक्ति के समग्र विकास के मूल आधार हैं। पंचकोशात्मक विकास व्यक्ति को केवल विद्वान नहीं, बल्कि संस्कारित, चरित्रवान और राष्ट्रनिष्ठ बनाता है। उन्होंने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में शारीरिक, प्राणिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास पर समान रूप से ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि विद्या भारती संस्कार और राष्ट्रभाव पर आधारित समग्र शिक्षा पद्धति के माध्यम से विद्यार्थियों में आदर्श नागरिकता का निर्माण कर रही है। पंचकोशात्मक विकास भारतीय शिक्षा दर्शन की आत्मा है, जो व्यक्ति को आत्मकेंद्रित जीवन से ऊपर उठाकर समाज और राष्ट्र के लिए जीना सिखाता है।
सत्र में समाजसेवी निमेष मेहता भी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण वर्ग में दिनभर आधारभूत विषय, वैदिक गणित, शिशुवाटिका, योग, संगीत और खेल विषयों पर गतिविधि आधारित सत्र, चर्चा और संवाद आयोजित किए गए। संस्कृत विभाग में संस्कृत संभाषण, वार्षिक योजना, संस्कृत सप्ताह योजना, पाठ योजना, फलक निर्माण और प्रेरक पत्र निर्माण का अभ्यास कराया गया। वैदिक गणित सत्र में भारतीय गणित की गौरवशाली परंपरा और विभिन्न क्रियात्मक प्रयोगों का प्रदर्शन किया गया।
शारीरिक विभाग में अनिवार्य शारीरिक, व्यायाम योग, सामूहिक समता, तिष्ट योग, खेल और वार्षिक योजना पर प्रशिक्षण दिया गया। नैतिक और आध्यात्मिक सत्रों में संस्कारक्षम वातावरण निर्माण, बालकों में समरसता भाव जागरण और हिन्दुत्व आधारित जीवन दृष्टि जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। शिशुवाटिका विभाग में हवन, गतिविधि आधारित शिक्षण, लघु नाटिका और व्यवहारिक आयामों का अभ्यास कराया गया। योग विभाग में संधि योग, बैठे, खड़े और लेटे आसनों, त्राटक प्रयोग, गीता श्लोक, स्वास्थ्य सूत्र और योग प्रार्थना का अभ्यास कराया गया। संगीत विभाग में वंदना, गीत, मंत्र, ताल और रागों के अभ्यास के साथ स्वर लिपि का प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण वर्ग में सहभागी आचार्यों और विषय प्रमुखों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए शिक्षण को अधिक संस्कारक्षम और प्रभावी बनाने हेतु विविध गतिविधियों का अभ्यास किया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा देव चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलन और वंदन के साथ हुआ। अतिथि परिचय प्रांत प्रशिक्षण संयोजक और वर्ग पालक महेन्द्र सिंह सिसोदिया ने कराया। जिला अध्यक्ष रमेश चन्द्र बृजवासी और जिला सचिव ललित दवे ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन केसरीमल पंड्या ने किया। वर्ग के प्रचार-प्रसार प्रमुख सुरेश चन्द्र त्रिवेदी ने जानकारी प्रदान की। वंदेमातरम् के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस प्रशिक्षण वर्ग ने भारतीय शिक्षा दर्शन, संस्कारयुक्त शिक्षण पद्धति और राष्ट्रनिष्ठ जीवन मूल्यों को व्यवहारिक रूप में आत्मसात करने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश दिया।

Pratahkal Bureau
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